X

Holashtak Kya Hai-होलाष्टक क्या है और इसके पीछे की क्या कहानी है

What is Holashtak: होलाष्टक क्या है और इसके पीछे की क्या कहानी है

होलाष्टक क्या है (Holashtak kya hai )

Holashtak Kya hai -आपको नाम से ही पता चल जाता है की ये होली से सम्बंधित है | होली रंगो का त्यौहार है | होलाष्टक शब्द को विच्छेद करने से दो अर्थ निकलता है एक है होली और दूसरा है अष्टक यानि होली के आठ दिन पूर्व | यानि हम जो लिखने जा रहे है यह होली के आठ दिन के पहले के बारे में लिख रहा हूँ | इसे आप खरमास भी कह सकते है |

होलाष्टक में क्या करें क्या न करें

सनातन धरम-ग्रंथों के अनुसार होली के आठ दिन पहले से ही किसी भी प्रकार के शुभ कार्य करने से मनाही होती है | क्योकि ये दिन अशुभ माने जाते है | शुभ कार्य जैसे:- शादी-विवाह , भूमि-पूजन , गृह प्रवेश, नया व्यापार शुरू करना, कोई नई जगह पर जाना या फिर किसी से किसी भी प्रकार का लेनदेन करना आदि कोई भी मांगलिक कार्य नहीं करना चाहिए  | इन दिनों नववधू को भी मायके नहीं जाने दिया जाता है |

2020 में कब है होलाष्टक

इस बर्ष 2020 में होलाष्टक 3 मार्च से लेकर 9 मार्च तक रहेगा | इस बीच कोई भी शुभ कार्य नहीं करें |

पौराणिक कथाए

एक मान्यता के अनुसार असुरों के राजा दैत्यराज हिरण्यकश्यप ने अपने पुत्र प्रह्लाद को भगवान् विष्णु का बहुत बड़ा भक्त था | जिसके मन से भगवन भक्ति को निकलने के लिए तरह तरह की यातनाए दी गई | यह सिलसिला अष्टमी से ही शुरू होकर पूरा आठ दिन तक चला | हिरण्यकश्यप ने प्रह्लाद को मारने के लिए पर्वत के नीचे गिराया गया , हांथी के पैरों के नीचे कुचलाया गया |

लेकिन भक्त प्रह्लाद भगवान् भक्ति से ज़रा भी विचलित नहीं हुए | भगवान ने भी अपने भक्त की रक्षा करते रहे | और अंत में होलिका दहन के बाद ये सिलसिला ख़त्म हुआ | प्रह्लाद के यातनाए से भरे ये दिन अशुभ माना जाता है | और इस दिन कोई भी शुभ कार्य नहीं किया जाता है |

एक ये भी मान्यता है की फाल्गुन शुक्ल अष्टमी के दिन भगवान् शंकर ने अपने तपस्या से भंग करने पर कामदेव को भस्म कर दिया था | कामदेव को प्रेम के देवता कहलाते है | जिससे सभी में घोर निराशा छा गई | लेकिन कामदेव की पत्नी रति के विनती करने पर भगवान् ने उसे फिर से पुनर्जीवित करा दिया | और फिर से चेहरे पर मुस्कान छा गई | होलाष्टक अंत होलिका दहन या धुलेंडी के साथ होता है |

होलाष्टक ( Holashtak Kya hai )का महत्व

होलाष्टक का हिन्दू धर्म में बहुत ही महत्व है | इस दिन कोई भी शुभ कार्य नहीं करते है | लेकिन अपने आराध्य देव की पूजा अर्चना कर सकते है, इससे आपको महापुण्य की प्राप्ति होती है | पुण्य के भागी के लिए धन , वस्त्र, अनाज या अपनी समर्थ अनुसार धन का दान गरीबों एवं ब्राह्मणो में कर सकते है |

कैसे मनाए होलिकाष्टक

video देखने के लिए यहाँ click करें

होलिका की पूजा करने के लिए जहाँ पर होलिका दहन होनी है वहां पर गंगा जल का छिड़काव करके शुध्द किया जाता है | और उस स्थान पर लकड़ी, उपले , घास आदि जमा करके ढेर बनाए जाते है |

Read Related Post:

Follow us on
Leave a Comment

This website uses cookies.

Read More