ग्लोबल वार्मिंग पर लघु निबंध- Global Warming Essay in Hindi

ग्लोबल वार्मिंग पर लघु निबंध- Global Warming Essay in Hindi

ग्लोबल वार्मिंग की समस्या एक बहुत बड़ी समस्या है . यह समस्या दिनोदिन बढ़ते ही जा रहा है . गर्मी के दिनों में आपने ये महसूस किया होगा की सुबह नौ बजे से ही भयंकर गर्मी महसूस होने लग जाता है ऐसा क्यों . ऐसा इसलिए होता है की पृथ्वी के सतह पर तापमान का बढ़ना .

200 words essay on global warming – ग्लोबल वार्मिंग पर लघु निबंध

ग्लोबल वार्मिंग को हम सरल और आसान शब्दों में हम इस प्रकार समझने की कोशिश करते है जब धरती पर बहुत ज्यादा तापमान या गर्मी बढ़ने से जो मौसम या जलवायु में जो परिवर्तन होता है , मौसम में जो अचानक बदलाव आता है उस बदलाव को ही हम ग्लोबल वार्मिंग कहते है .

इसके बदलाव के मुख्य घातक मानव ही है . क्योकि उन्होंने अपने सुख- सुविधाओं के लिए रोज नए नए अविष्कार किए जा रहे है , उधोग धंधों के उत्सर्जित हानिकारक गैसें जैसे- कार्बन-डाइऑक्साइड, नाइट्रोजन , मीथेन आदि से वायुमंडल में ऑक्सीजन की मात्रा लगातार घटते जा रहे है और कार्बन डाइऑक्साइड की मात्रा बढ़ते ही जा रहा है .

जब किसी उपग्रह पर मौजूद कुछ गैसें वातावरण के तापमान को अधिक बनाने में मदद करने लगती है तो इसे ही ग्रीनहाउस प्रभाव कहते है और इनमे कार्बन-डाइऑक्साइड तथा मीथेन जैसे गैसों का नाम आता है . यही प्रभाव पृथ्वी को संतुलन बनाए रखते है अन्यथा जीवों का अस्तित्व खतरे में पड़ जाता .

वातावरण में कार्बन-डाइऑक्साइड, मीथेन तथा नाइट्रोजन की अत्यधिक मात्रा बढ़ने से ग्लेशियर जो अटलांटिक महादेश से का बर्फ लगातार पिघलते जा रहा है  और जल स्तर लगातार बढ़ते जा रहा है .

Essay on causes and effects of global warming in 300 words

जलवायु परिवर्तन को ही ग्लोबल वार्मिंग कहते है . जब धरती पर तापमान की वृद्धि को ही ग्लोबल वार्मिंग कहते है . यह मुख्यत; दो प्रकार से होता है एक है प्राकृतिक घटना से और दूसरा है मानव द्वारा .

Reason

 ग्रीन हाउस इफ़ेक्ट वो प्राकृतिक कारन है. कार्बन मोनोऑक्साइड तथा सल्फर डाइऑक्साइड इसके अच्छा उदहारण है . ये गैसें सौर किरणें को पृथ्वी को आने से रोकता है जिससे पृथ्वी का तापमान में वृद्धि होती है . सालों से मौसम में बदलाव हो रहे है जिसे हम प्राकृतिक को जिम्मेदार ठहराते है, लेकिन ये मानव की उपज है .

औधौगीकरण कर शहरीकरण यह मुख्य दो कारन है जो हम अपने वातावरण को ग्लोबल वार्मिंग की तरफ ले  जा रहे है. अधोगो से निकलने वाले जहरीले केमिकल जैसे कार्बन मोनोऑक्सइड तथा मीथेन जैसे खतरनाक गैस वायुमंडल में मिलकर हमारे प्राणदायिनी हवा को कार्बन डाइऑक्साइड में परिवर्तित कर रहा है .

हम जनसँख्या को बसाने के लिए जंगलों की अंधाधुन कटाई कर रहे है जिससे वातावरण में कार्बन डाइऑक्साइड की मात्रा बढ़ती ही जा रही है . पेड़ पौधे कार्बन डाइऑक्साइड को ग्रहण करके ऑक्सीजन गैस छोड़ते है लेकिन वृक्षों की कटाई से प्राकृतिक का संतुलन बिगड़ता जा रहा है .

 

 

 

 

Effect

वायुमंडल में कार्बन डाइऑक्साइड के बढ़ने से बहुत तरह की प्राकृतिक आपदा का सामना मानव जाती को करना पड़ता है जैसे-

  • भयंकर गर्मी और तेज गर्मी का लहर का आना
  • अचानक मौसम में बदलाव और जोरदार बारिश का होना
  • समुद्री तूफान और चक्रवात का आना
  • बारिश का बराबर न होना
  • तेज और जानलेवा बारिश होना जिससे बाढ़ जैसे हालत का होना
  • महामारी जैसे बीमारी का फैलना
  • ज्वालामुखी बिस्फोट
  • प्राकृतिक में अजीबो गरीब घटना का होना,

 

इसलिए हमे इन सभी के बारे में जागरूक होना अति आवश्यक है अन्यथा संपूर्ण मानव जाति का अस्तित्व खतरें में पड़ जाएगी .

Global warming short essay

 

यह समस्या अब पुरे विश्व के लिए ही बनती जा रही है . पूरा विश्व समुदाय इसको लेकर काफी चिंतित भी है , लेकिन चाह कर भी कुछ नहीं कर पा रहे है . उल्टा और ही बढ़ता ही जा रहा है .
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ग्लोबल वार्मिंग की समस्या एक दिन संपूर्ण विश्व को एक बहुत बड़े खतरे में डाल देगा . इसके जिम्मेदार खुद हम ही है . मानव जाति ने प्राकृतिक के संसाधनों का जमकर दोहन किया है . हमने अपने देश के विकाश के लिए तरह तरह के कल -कारखाने और उधोग-धंधे की स्थापना करवाए  और जिससे रोजाना उस उधोग धंधे से ढेर सारा केमिकल-कचरा कार्बन मोनोऑक्सइड के रूप में हमारी जीवन रक्षक हवा ऑक्सीजन को कार्बन डाइऑक्साइड में परिवर्तित कर रहा है , जिससे वातावरण में तापमान निरंतर बढ़ता ही जा रहा है . और ये कार्बन-डाइऑक्साइड, मीथेन तथा नाइट्रोजन जैसे गैस ग्रीन हाउस प्रभाव के कारण वायुमंडल में तापमान को बढ़ा रहे है .

पृथ्वी पर बढ़ते तापमान के कारण जो वैश्विक संकट पैदा हो रहा है वही ग्लोबल वार्मिंग है . सालों से प्राकृतिक में अपने आप परिवर्तन होते आ रहे है जिसका मुख्या कारण है ग्रीन हाउस प्रभाव. इस बढ़ते तापमान के कारण मौसम में जबरदस्त परिवर्तन देखने को मिल रहा है , जैसे भयंकर ठण्ड का पड़ना, बहुत ज्यादा गर्मी का पड़ना, अचानक मौसम बदल जाना, अचानक बारिश होने लगना, अचानक ज्वालामुखी बिस्फोट का होना, दिन-रात में अमूल परिवर्तन का होना जिसे हम जानकर भी अनजान बने हुए है .

ग्रीन हाउस में वे गैसे होती है जो वातावरण के अंदर की गर्मी या ऊष्मा को अपने अंदर सोंख लेती है . इसमें ज्यादा महत्वपूर्ण गैस जो है वो है कार्बन डाइऑक्साइड जो हम सांस द्वारा छोड़ते है . हम श्वशन क्रिया में ऑक्सीजन गैस लेते है और कार्बन डाइऑक्साइड को छोड़ते है . और इस प्रकार पृथ्वी का तापमान 3 डिग्री से 8 डिग्री सेल्सियम तक बाढ़ जाने का अनुमान है, अगर ऐसा हुआ तो भयंकर परिणाम भुगतने होंगे .

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