Kaal Bhairav Jayanti Essay-काल भैरव भगवान शंकर के अवतार की महिमा और पूजा-विधि का वर्णन

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काल भैरव जयंती कब मनाई जाती है ?काल भैरव अष्टमी . Kaal Bhairav Jayanti Essay in Hindi

Kaal Bhairav Jayanti Essay :-मार्गशीर्ष माह अति उत्तम माना गया है , इसलिए इस मास में पूजा-पाठ करने से भक्तों को विशेष लाभ मिलता है। इस मास में काल भैरव जयंती पर्व का भी विशेष महत्व बतलाया गया है। काल भैरव देवता को भगवान शिव का रौद्र अवतार माना जाता है। लेकिन भगवान काल भैरव भोलेनाथ की तरह ही जब अपने भक्तों से प्रसन्न हो जाते हैं तो उसपर असीम कृपा की वर्षा करते हैं।

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हिन्दू पंचांग एवं मान्यताओं के अनुसार मार्गशीर्ष मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि के दिन काल भैरव जयंती पर्व या काल भैरव अष्टमी मनाई जाती है। काल भैरव भगवान् भोले नाथ का रौद्र रूप होता है। इसलिए 16 नवम्बर को काल भैरव जयंती (Kaal Bhairav Jayanti Essay ) मनाई जाएगी। मान्यता है कि इस दिन काल भैरव स्तोत्र का पाठ करने से भक्तों को विशेष आशीर्वाद मिलता है और उनके जीवन में आने वाली कठिनाइयां दूर हो जाती हैं। शास्त्रों में बताया गया है कि इस स्तोत्र का पाठ करने से अकाल मृत्यु का भय दूर हो जाता है.

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काल भैरव की पूजा आराधना करने से आरोग्यता का आशीर्वाद मिलता है। साथ ही व्यक्ति को लंबी उम्र का वरदान भी प्राप्त होता है। लौकिक-परलौकिक जितने भी बाधाएं होती हैं सभी टल जाती हैं. आपकी सभी मनोकामनाएं तो पूर्ण होती ही हैं वहीं ये भी माना जाता है कि इससे भक्त की उम्र भी बढ़ती है. जब व्यक्ति स्वयं को परेशानियों से घिरा पाता है और हर जतन असफल होने लगता है, ऐसे में कालभैरव की पूजा बहुत ही लाभकारी बताई गई है.

भैरव बाबा को प्रसन्न करने के उपाय

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार शिवपुराण में श्रीशिव के कई अवतारों का वर्णन है, इसके बारे में बहुत कम लोग जानते हैं. वैसे धर्म गन्थों में इनके उन्नीस अवतारों की पूरी जानकारी मिलती है, इन्हीं में एक काल भैरव का रूप विशेष है. शिवपुराण की शतरूद्र संहिता के मुताबिक श्रीशिव ने मार्गशीर्ष माह के कृष्ण पक्ष की अष्टमी को इसी रूप में अवतार लिया था. इस साल काल भैरव अष्टमी तिथि बुधवार 16 नवम्बर 2022 को है.

काल भैरव : शंकर भगवान् के रौद्र रूप

भगवान् शिव का विश्वेश्वर स्वरूप अत्यन्त सौम्य, शांत है. और उनका काल भैरव रूप अत्यन्त रौद्र, भयानक, विकराल तथा प्रचण्ड है. इसी रूप ने दक्ष प्रजापिता श्री ब्रह्मा का गर्व का मर्दन किया और अपनी अंगुली के नाखून से इनके पांचवे सिर को काट दिया था. तब भैरव ब्रह्महत्या के पाप से दोषी हो गए. इन्हें काशी तीर्थ में ब्रह्महत्या से मुक्ति मिली. कालभैरव काशी के कोतवाल (नगर रक्षक) हैं तथा काशी में इनकी पूजा का अधिक महत्व है.

काल भैरव की पूजा किस दिन होती है ?

काशी में भैरव बाबा के बटुक भैरव, काल भैरव, आनन्द भैरव आदि के नाम से कई मंदिर हैं. और भैरव का जन्म दोपहर के समय में हुआ था, इसलिए मध्याह्मव्यापिनी अष्टमी में पूजा करनी चाहिये. इस दिन प्रातः काल उठकर नित्यकर्म से निर्वित तथा स्नान करके साफ़ वस्त्र धारण करें और व्रत का संकल्प करना चाहिये और भैरव के मंदिर में जाकर वाहन सहित विधिवत उनकी पूजा करनी चाहिये. ‘ऊँ भैरवाय नमः‘* इस नाम मंत्र से षोडशोपचार पूर्वक पूजन करना चाहिये.

काल भैरव जयंती का महत्व (Kaal Bhairav Jayanti Essay)

भैरव बाबा का वाहन कुत्ता है, इसका मतलब इस दिन कुत्तों को मिठाईया वगैरह खिलानी चाहिये. इस दिन उपवास रखकर भगवान् काल भेरव के समीप जागरण करने से इंसान सभी पापों से मुक्त हो जाता है. हालांकि इस बार बुधवार को यह पर्व आ रहा है लेकिन अगर भैरवाष्टमी यदि मंगलवार या रविवार को पड़े तो इनका महत्व कई गुना और भी बढ़ जाता है.

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भगवान भैरव बाबा की पूजा करने से हर प्रकार की नकारात्मक ऊर्जा नष्ट हो जाती हैं. इस दिन गंगा में स्नान, पितरों का तर्पण, श्राद्ध करने के बाद इनकी पूजा करने से साल भर के लिए लौकिक-परलौकिक विघ्न टल जाते हैं और साधक की आयु में वृद्धि होना भी सम्भव है.

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