The elephant rope story-हाथी और रस्सी की कहानी

The elephant rope story-हाथी और रस्सी की कहानी

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The elephant rope story-ताकतवर हाथी और कमजोर रस्सी की प्रेरणादायक कहानी

The elephant rope story – एक बार कि बात है दो-तीन आदमी साथ में कही जा रे है | बिच में उसे छोटा सा गांव दिखाई दिया | गांव से होकर वे सभी जा रहे थे | उस गांव में हाँथी को पालतू बनाकर रखा हुआ था | उसे गांव के बाहर पेड़ के पास एक पतली सी रस्सी से बंधी गई थी |

उसने जब यह देखा तो उसे बहुत आश्चर्य हुआ की कैसे एक विशालकाय जानवर को एक कमजोर रस्सी के सहारे बंधा हुआ रह सकता है। क्योकि वहा ना तो कोई जंजीर थी, ना ही कोई नहीं पिंजरा। और वो हाथी चाहे तो एक झटके में इस बंधन से मुक्त हो सकता हैं, लेकिन वह ऐसा नहीं कर रहा क्या कारण है इसका ?

फिर वह किसी से कुछ पूछना चाह रहा था लेकिन वहां पर कोई नजर नहीं आ रहा था | लेकिन दूर से आते हुए उसने वहाँ एक हाथी के मालिक को देखा। उसने उससे पूछा –

हाथी एक विशालकाय जानवर है , लेकिन क्यों इस कमजोर रस्सी से बंधा हुआ खड़ा है और भागने का बिलकुल भी प्रयास नहीं करता, जबकि वो एक झटके में इसे तोड़ सकता हैं।

तब उसने जवाब दिया – जब यह हाथी बहुत छोटा था यानि बच्चा था , तब मैं इसी रस्सी के सहारे इसे बाँधा करता था। तब ये रस्सी इतनी मजबूत थी की इसको मजबूती पकडे रहती थी। और यह रस्सी तोड़कर नहीं भाग पता था। इसने रस्सी को तोड़ने के लिए बहुत प्रयास किया, लेकिन इसका हर प्रयास विफल रहा।

हारकर इसने रस्सी को तोड़ पाना असम्भव मान लिया और रस्सी पर जोर लगाना भी छोड़ दिया। हाँथी के बच्चे ने यह समझ लिया होगा इस रस्सी को तोड़ पाना मेरे लिए बहुत असंभव है |

फिर धीरे धीरे यह बड़ा होता गया। इसे अभी भी लगता हैं की इस रस्सी से आजाद होना मेरे बस की बात नहीं हैं। फिर इसने रस्सी को तोड़ने का कभी प्रयास नहीं किया। आज यह एक वयस्क बलवान हाथी है लेकिन इसने रस्सी से हार मान ली है।

वह यह जवाब सुनकर हैरान था। यह जानवर किसी भी समय रस्सी को तोड़कर अपने बंधन से मुक्त हो सकता है। लेकिन उसने मान लिया है, कि वह ऐसा नहीं कर सकता। इसलिए उसी कमजोर रस्सी के सहारे बंधन में है, जिससे वह बचपन से बँधता आया हैं।

मोरल :- तो दोस्तों, इस हाथी की तरह ही, हममे से कितने ही लोग ऐसे है, जो यह मान लेते हैं की वो जीवन में ये काम नहीं कर सकते क्योंकि पिछली बार हमने प्रयास किया था तो विफल रहे थे। अपने आपको एक सीमित सोच में बांध लेते हैं, और बोलते हैं की भाई ये तो मेरे बस का नहीं हैं।और वो कोशिश करना भी छोड़ देते हैं।

जिससे वो उन्नति के पथ आगे नहीं बाद पाते हैं।

दोस्तों इस कहानी से हमें क्या सिख मिलती है ? कि हमें प्रगति के पथ पर निरंतर आगे बढ़ते रहना चाहिए | हमें ऐसा नहीं सोचना चाहिए कि उसने ऐसा किया था और विफल हो गया | क्योकि दुनिया में असंभव नाम कि कोई चीज नहीं है ? There is a nothing impossible .

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