साहस और जूनून की कहानी – Arunima Sinha Motivation Story Hindi

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Arunima Sinha Motivation Story Hindi- जोश और जूनून

Arunima Sinha Motivation Story Hindi- दुनिया में Opportunity की कोई कमी नहीं है , केवल आपके अंदर जोश और जूनून होना चाहिए । आपको अपने सपनों को पाने के लिए जिद्दी या पागल बनना पड़ेगा . अगर आपके अंदर कुछ कर गुजरने का इरादा हो तो परिस्थितियां आपके अनुकूल होगी और सफलता आपके कदम चूमेगी .

 

में बात कर रहा हूँ ऐसे इंसान की जिसने अपने मजबूत इरादे के बल पर अपने सपनों को पूरा किया . और पूरी दुनिया में एक मिशाल कायम किया .

 

में एक ऐसी जिद्दी लड़की की बात कर रहा हूँ जो एक पैर से अपंग हो गई उसके बाद से वह जिद्दी हो गई और कुछ करने की ठान लिया .  

 

दोस्तों में बात कर रहा हूँ अरुणिमा सिन्हा जो एक पर्वतारोही है . चलिए अब पूरी कहानी जानते है . एक बार वो ट्रैन में कहीं सफर कर रही थी , अचानक उस डब्बे में कुछ बदमाश आ गए और रात का समय था .

 

उन बदमाशों ने लूटमार करने लगे .  मेरे पास भी सोने की एक लॉकेट था जिसे हमने देने से मना कर दिया . बस फिर क्या था उन बदमाशों ने महज एक सोने के लॉकेट के लिए मुझे चलती ट्रैन से निचे फेक दिया यह वाकया बर्ष 2011 की थी .

 

निचे गिरने के बाद वह पूरी रात रेलवे ट्रैक पर पड़ी रही सुबह जब नींद खुली तब मेरी एक पैर कट चुकी थी .

उसके बाद रेलवे कर्मचारियों द्वारा उसे हॉस्पिटल में भर्ती करवाया गया  , और वहां पर इलाज चला . लेकिन उनका एक पैर हमेशा के लिए काट दिया गया . यहाँ पर उसने देखा की लोग उसे अलग नजर से देख रहे है . यानि लोगों की देखने की नजरिया बदल चुकी थी . सभी लोग उसे Disable समझकर सहानुभूति और दया के भाव से देख  रहे थे .

Arunima Sinha Motivation Story Hindi-  प्रेरणादायक कहानी 

 

लोगों द्वारा इस तरह से उसे देखना अच्छा नहीं लगा . अब उसके अंदर कुछ करने का इरादा जग गया और उसने उसी समय बैड पर पड़े पड़े ठान लिया में कुछ ऐसा करुँगी लोग मुझे सहानुभूति के बजाय सम्मान की दृष्टि से देखे .

 

उसने मन ही मन सोचा में वो करुँगी जो दोनों पैर होने के बावजूद भी नहीं कर पाते है वो में एक पैर से ही कर के दिखाउंगी . उसके बाद उसके लाइफ का स्ट्रगल चालू हुआ . उसके बाद हॉस्पिटल से डिस्चार्ज होने के बाद अपने घर जाने के बजाय वह वहां से सीधे माउंट एवेरेस्ट की ट्रेनिंग लेने ट्रेनिंग सेंटर चली गई .

 

वह मन ही मन  डर भी रही थी की सोचने और करने में आकाश और  जमीन  का अंतर होता है . फिर भी उसने हिम्मत नहीं हारी . और ट्रेनिंग लेती रही .

 

अभी उसके पैर का जख्म ठीक भी नहीं हुआ था और कभी कभी ट्रेनिंग के दौरान पैर से ब्लड आने लग जाता है लेकिन उसने परवाह न करते हुए आगे बढ़ते गए ।

 

अभी उसके पैर का जख्म ठीक भी नहीं हुआ था और कभी कभी ट्रेनिंग के दौरान पैर से ब्लड आने लग जाता है लेकिन उसने परवाह न करते हुए आगे बढ़ते गए ।

 

अब वह ट्रेनिंग पूरी करके माउंट एवेरेस्ट पर चढ़ाई के लिए बिलकुल तैयार थी । लेकिन यहाँ भी उसे बहुत परेशानियों का सामना करना पड़ा । क्योकि उसके एक पैर लकड़ी के थे यानि नकली थे । जिसे देखकर शेरपा ने उसे मना क़र दिया । लेकिन अरुणिमा अपने जिद्द पर अड़ी रही । 

 

शेरपा ने उसके आत्मविश्वास और हिम्मत को देखकर अरुणिमा से हार मान लिया । और चढ़ाई शुरू क़र दिया । लेकिन  कहावत है की असफलता बार बार परेशान करती है . अरुणिमा के साथ भी यही हुआ . अब वह पहुंचने ही वाली थी की ऑक्सीजन सिलिंडर ख़त्म हो गया . शेरपा ने उसे बार बार मना किया .

 

लेकिन उसने साफ़ मना कर दिया और कहा अब में एवेरेस्ट की  चोटी पर चढ़ कर ही दम लूंगा चाहे मुझे मृत्यु क्यों न प्राप्त हो . लेकिन एवेरेस्ट की चोटी पर पहुंचे बिना वापस नहीं जाऊंगा .

 

और 52 दिन की कठिन संघर्ष के बाद उसने एवेरेस्ट की चोटी पर पहुँच कर तिरंगा लहरा दिया . उसने अपना सपना को पूरा किया .

 

निष्कर्ष – अरुणिमा सिन्हा पहली विकलांग महिला पर्वतारोही है जिन्होंने की एवेरेस्ट की ऊँची  चोटी पर चढ़कर तिरंगा लहराया . इस कहानी से हमें यही सिख मिलती है की हमें अपने सपनो से कोम्प्रोमाईज़ नहीं करना चाहिए और परिस्थितियों को बाधक नहीं बनाना चाहिए . अगर आप कोई काम करने का ठान लेते है तो मुश्किलें अपने आप आपके रिश्ते से  हट जाता है और सफलता आपके पास आ जाती है .

 

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