International Literacy Day:- अंतर्राष्ट्रीय साक्षरता दिवस पर निबंध

International Literacy Day-अंतर्राष्ट्रीय साक्षरता दिवस पर निबंध

`International Literacy Day:- अंतर्राष्ट्रीय साक्षरता दिवस पर निबंध

मनुष्य और पशु में क्या फर्क है? आप बता सकते है ? कोई अंदाजा?

सबसे बड़ा अंतर है शिक्षा | शिक्षा ही है जो हमें जानवर से अलग करती है | शिक्षा हमारे लिए क्यों जरुरी है ? अगर माहे मनुष्य बनकर रहना है तो हमें शिक्षा को अपनाना होगा |

जब विश्व की लोगों ने ये जाना की मनुष्य के सभी जरुरत के अनुसार शिक्षा भी बहुत जरुरी है | इसलिए सभी विश्व समुदाय एकत्रित होकर इस काम का उत्तरदायित्व यूनेस्को (संयुक्त राष्ट्र शैक्षिक वैज्ञानिक और सांस्कृतिक संगठन) को सौपा |

फिर यूनेस्को ने सभी अधिकारीयों से विचार-विमर्श करके वे इस नतीजे पर पहुंचे और उसने 17 नवंबर 1965 को ये घोषणा किया की हम सभी विश्व समुदाय के लोग हर साल 8 सितंबर के दिन को  “अंतर्राष्ट्रीय साक्षरता दिवस” के रूप में मनाएंगे । तबसे अंतर्राष्ट्रीय साक्षरता दिवस 8 सितंबर को प्रत्येक बर्ष मनाया जाता है | और पहला “अंतर्राष्ट्रीय साक्षरता दिवस” 8 सितंबर 1966 को मनाया गया था।

आज दुनिया से अशिक्षा को समाप्त करने के संकल्प को लेकर  हम सभी 52वां  ‘अंतरराष्ट्रीय साक्षरता दिवस’ मना चुके है | आज समाज का हर व्यक्ति  तथा हर समुदाय शिक्षा पर जागरूक होकर पूरा विश्व  इसे मानते है |

अंतर्राष्ट्रीय समुदाय के लिये वयस्क शिक्षा और साक्षरता की दर को दुबारा ध्यान दिलाने के लिये इस दिन को खासतौर पर मनाया जाता है।

आप सभी जानते है की निरक्षरता एक अभिशाप है | एक सभी समाज और असभ्य समाज में बहुत ही अंतर होता है |

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हमारे भारत देश एक ग्रामीण प्रधान देश है और यहाँ की 70 प्रतिशत जनसख्या गांवों में ही रहती है जो गरीबी,अंधविश्वास,अशिक्षा के कारण कई अन्य प्रकार के शोषण का शिकार होते हैं। साक्षरता आंदोलन के जरिए इस तरह के कई जाति,धर्म,स्थानीय और प्रांतीय भेदभाव की सीमाओं को तोड़ा है और लोगों को जागरूक किया है|

अंतरराष्ट्रीय साक्षरता दिवस समारोह (International Literacy Day celebration)

भले ही दुनिया 52वां विश्व साक्षरता दिवस मना चुके है | लेकिन एक ताजा रिपोर्ट के अनुसार भारत में साक्षरता का अनुपात बहुत ही कम है |

भारत के बारे में यूनेस्को की ग्लोबल एजुकेशन मॉनिटरिंग ने एक रिपोर्ट पेश किया है जिसके अनुसार वर्ष 2050 में प्राइमरी शिक्षा, 2060 में माध्यमिक शिक्षा और 2085 में उच्च माध्यमिक शिक्षा का वैश्विक लक्ष्य हासिल करने में कामयाब होगा।

आजादी के पहले की बात करें तो हमारे देश की हालत बहुत ही बुरी थी | लेकिन आजादी के बाद से देश में साक्षरता का ग्राफ 57 फीसदी बढ़ा है बावजूद इसके हम वैश्विक स्तर पर काफी पिछड़े हैं।

2011 की जनगणना के अनुसार हमारे राज्यों की साक्षरता की दर इस प्रकार है :-

केरल        93.91 %

लक्ष्यद्वीप    92.28%

मिजोरम    91.58%

त्रिपुरा       87.75 %

गोवा    87.40%

दिल्ली   86.34%

विश्व के मामले में भारत देश की साक्षरता दर 75.06% है जो बहुत कम है। जबकि भारत सरकार देश में शिक्षा की दर को बढ़ाने के लिए सर्व शिक्षा अभियान , प्रौढ़ शिक्षा योजना, बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ योजना और साक्षर भारत के जरिए इस दिशा में सार्थक कदम उठाए जा रहे हैं। वर्ष 2011 की जनगणना के अनुसार देश में साक्षरता दर 75.06 है। हालांकि वर्ष 1947 में यह महज 18 फीसदी थी।

देश में आर्थिक असमानता की तरह ही साक्षरता का प्रतिशत भी महिलाओं और पुरुषों में भी अलग अलग है।  जहां पुरुषों की साक्षरता दर 82.14% है वहीं महिलाओं में इसका प्रतिशत महज 65.46 है। महिलाओं में कम साक्षरता का कारण अधिक आबादी और परिवार नियोजन की जानकारी कमी है।

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वर्ष 2011 जनगणना के अनुसार देश में साक्षरता 9.2 प्रतिशत की दर से बढ़ी है। यूनेस्को के अनुसार दुनिया भर में करीब 78 करोड़ लोग अशिक्षित हैं। इन 78 करोड़ लोगों का 75 फीसदी केवल इन 10 देशों में है जिनमें भारत, चीन, बांग्लादेश, नाइजीरिया, पाकिस्तान, इथियोपिया, ब्राजील, इंडोनेशिया और कांगो शामिल है। हालांकि इन 10 मुल्कों में से कुछ ऐसे भी हैं जिनकी साक्षरता दर बीते कुछ सालों में तेजी से बढ़ी है। इसमें नेपाल, इथोपिया और बांग्लादेश शामिल है|

अंतरराष्ट्रीय साक्षरता दिवस क्यों मनाया जाता है

शिक्षा इंसान के सर्वांगीण विकास के लिए काफी अहम है। यह किसी समाज और देश को तरक्की के रास्ते पर ले जाने की बुनियाद है।

मानव के समुचित विकाश तथा समाज के लिए उनके अधिकारों को जानने जैसे सभी कार्यों के लिए शिक्षा जरुरी है | अगर आप शिक्षित है तो आपकी पत्नी भी शिक्षित होगी परिणामस्वरूप बच्चे भी शिक्षित होंगे तभी देश का विकाश होगा |

गरीबी को मिटाना, बाल मृत्यु दर को कम करना, जनसंख्या वृद्धि को नियंत्रित करना, लैंगिक समानता को प्राप्त करना आदि को जड़ से उखाड़ फेंकना बहुत जरुरी है। अगर हम साक्षर होंगे तभी हम परिवार और देश की प्रतिष्ठा को बढ़ा सकता है। साक्षरता दिवस उत्सव लगातार शिक्षा को प्राप्त करने की ओर लोगों को बढ़ावा देने के लिये और परिवार, समाज तथा देश के लिये अपनी जिम्मेदारी को समझने के लिये मनाया जाता है।

अंतर्राष्ट्रीय साक्षरता दिवस 2019 थीम-Theme of International Literacy Day

पहला साक्षरता कार्यक्रम बांग्लादेश की राजधानी ढाका में आयोजित किया गया | और वहां की सरकार यूनेस्को के मदद से बालिकाओं और महिलाओं की साक्षरता और शिक्षा: के सतत विकास की नींव विषय पर अंतरराष्ट्रीय गोष्ठी आयोजित की गई |

और बर्ष 2011 साक्षरता दिवस का थीम है- साक्षरता और सतत विकास | साक्षरता उन प्रमुख तत्वों में से एक है, जिसकी सतत विकास को बढ़ावा देने के लिए आवश्यक है | चूंकि साक्षरता आम आदमी को सशक्त बनाती है, इसलिए इंसान अपनी आर्थिक क्षमता में बढ़ोतरी और सामाजिक विकास समेत पर्यावरण के बारे में सही फैसले ले सकता है|

साक्षरता दिवस पर स्लोगन

यूनेस्को का साक्षरता मिशन ।

साक्षर होंगे सारे जन, विकसित ह गा वतन ।

साक्षर नागरिक प्रगतिशील राष्ट्र ।

यूनेस्को का सोचना, हर नागरिक को साक्षर करना ।

यूनेस्को का प्रयास, शिक्षा की सुविधा हो हर नागरिक के पास ।

शुद्ध सुरक्षित असरदायक, यूनेस्को साक्षरता मिशन है लाभदायक ।

यूनेस्को की कल्पना, संपूर्ण साक्षरता को होगा अपनाना ।

निष्कर्ष CONCLUSION

हम सभी भारतवासियों को “अंतर्राष्ट्रीय साक्षरता दिवस” (International Literacy Day) पर जोश और उल्लास के साथ मनाना चाहिये। अशिक्षित राष्ट्र कभी भी तरक्की के राह पर नहीं जा सकता । शिक्षा हमारे देश और समाज में फैले अंधकार  और कुरूतियों को दूर करती है।

शिक्षा के आभाव के कारन आए दिन गरीबी, स्कूल में शौचालयों की कमी, लड़कियों से होनी वाली बलात्कार और छेड़छाड़ की घटनाये, जातिवाद, बेटियों की शिक्षा की तरफ माता- पिता की उदासीनता जैसे घटनाए होती रहती है |

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