अभियंता दिवस (Happy Engineers Day) कब और क्यों मनाया जाता है ?

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हम सभी हर साल 15 सितम्बर को अभियंता दिवस (इंजीनियर्स दिवस) मनाते है . डॉक्टर एम विश्वेश्वरैया एक महान अभियंता थे और उनका जन्म भी 15 सितम्बर को हुआ था . वे हमारे देश के पहले अभियंता थे . जिन्होंने भारत को एक नई आयाम और दिशा दी , जिनकी यादगारी में हम प्रत्येक साल 15 सितम्बर को उनके जन्मदिन पर अभियंता दिवस (इंजीनियर्स दिवस ) मनाते है .

अभियंता दिवस (Happy Engineers Day) कब और क्यों मनाया जाता है ?

इस दिन हम लोग सब मिलकर सभी अभियंता को दिल से बधाई देते है . मैसेज भेजते है और सोशल मीडिया पर टैग करके बधाई देते है .आजकल सोशल प्लेटफार्म टैग करके बधाई और धन्यवाद देने का बहुत ही अच्छा साधन हो गया है . क्योंकि अगर अभियंता नहीं हो तो जो आज जो बड़े बड़े पुल और बड़ी बड़ी मनमोहक इमारतें देख रही है , वो आपको कुछ भी दिखाई नहीं देता . इन्होने दुनिया की ढांचा ही बदल दिया . इस दिन सभी स्कुल कॉलेज तथा अन्य संस्थान सभी अवकाश होते है .

मोक्षगुंडम विश्वेश्वरैया की जीवनी ( mokshagundam visvesvaraya biography in Hindi)

डॉक्टर एम विश्वेश्वरैया देश के पहला अभियंता थे , जिन्होंने देश की रूप-रेखा की नई नीव रखी. इन्ही की मार्गदर्शन पर ही देश को एक नया आयाम मिला .

पूरा नाम मोक्षगुंडम विश्वेश्वरैया
जन्मतिथि 15 सितम्बर 1860
जन्मस्थान मुददेनहाली गांव जिला.चिक्कबल्लापुर (कर्णाटक),भारत
मृत्यु 14 अप्रैल 1962
आयु (मृत्यु के समय) 101
राष्ट्रीयता भारतीय
पेशा एक कुशल अभियंता
पुरुष्कार भारत रत्न
जाति तेलगु ब्राह्मण
पिता का नाम श्रीनिवास शास्त्री
माता का नाम वेंकाचम्मा

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इंजिनियर्स डे किसकी याद में मनाया जाता है ?

हमारे देश के महान इंजीनियर और राजनेता श्री मोक्षमुंडम विश्वेश्वरैया की याद में अभियंता दिवस हर साल 15 सितम्बर को मनाया जाता है . लेकिन अभियंता दिवस अब विश्व के कई देशों में भी मनाया जाता है , लेकिन वे अलग अलग तारीख को मनाते है . जैसे-अर्जेंटीना में 16 जून को तो बांग्लादेश में 7 मई को मनाते है . तो अब हम मोक्षमुंडम विश्वेश्वरैया के जीवन के बारे में अध्यन करेंगे .

श्री मोक्षमुंडम विश्वेश्वरैया का जन्म 15 सितम्बर को 1860 में मुददेनहाली गांव जिला.चिक्कबल्लापुर मैसूर रियासत में हुआ था, जो आज कर्नाटका राज्य बन गया है. इनके पिता का नाम श्रीनिवास शास्त्री एवं माता का नाम वेंकाचम्मा था . इनके पिता श्रीनिवास शास्त्री संस्कृत के प्रकांड विद्वान और आयुर्वेदिक चिकित्सक थे और इनकी माता वेंकचाम्मा एक धार्मिक स्वभाव की महिला थी. जब विश्वेश्वरैया 15 साल के थे, तब उनके सर से पिता का साया उठ गया यानि उनका निधन हो गया था.

शिक्षा (Education)

उस समय इनके गांव में कोई स्कुल नहीं था इसलिए इन्होने चिकबल्लापुर से प्रायमरी स्कूल की पढाई पूरी की, और आगे की पढाई के लिए वे बैंग्लोर में दाखिला लिया . सन 1881 में विश्वेश्वरैया ने मद्रास यूनिवर्सिटी के सेंट्रल कॉलेज, बैंग्लोर से बीए की परीक्षा पास की. इसके बाद मैसूर सरकार से उन्हें सहायता मिली और उन्होंने पूना के साइंस कॉलेज में इंजीनियरिंग के लिए दाखिला लिया. 1883 में LCE और FCE एग्जाम में उनका पहला स्थान आया. (ये परीक्षा आज के समय BE की तरह है).

उपलब्धि एवं जीवन-करियर

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