Compound in Hindi Vyakaran with Examples samas

Compound word samas Hindi -समास की परिभाषा और उसके भेद

समास की परिभाषा तथा समास के भेद ( Full details of Samas)
समास की परिभाषा
समास की परिभाषा, भेद की पुरी जानकारी उदाहरण के साथ । ये हिन्दी व्याकरण समास सभी वर्ग के विधार्थियों ले लिए अत्यन्त उपयोगी है ।

समास की परिभाषा

समास हिन्दी व्याकरण का एक सार्थक शब्द है, जिसका अर्थ होता है-संक्षिप्त या छोटा करना । दुसरे शब्दों में, संक्षेप करने की प्रक्रिया ही समास है ।

जब दो या दो से अधिक सार्थक शब्द मिलकर एक नया शब्द बनाते है, उस शब्द को समास कहते है । अर्थात अर्थ की दृष्टि से आपस में दो या दो से अधिक शब्द मिलकर स्वतंत्र बंधन से एक अन्य सार्थक शब्द का निर्माण करता है । जैसे:- नीला है जो कमल = नीलकमल  | संस्कृत तथा अन्य भारतीय भाषाओ में इसका उपयोग बहुत होता है । साथ ही जर्मन आदि भाषाओ मे समास का उपयोग होता है । इस प्रक्रिया में विभक्ति चिन्ह  तथा उपसर्ग लुप्त हो जाता है ।

सामासिक शब्द में आए दो पदों में प्रथम पद को ‘ पुर्वपद’ तथा द्वितीय पद को ‘उतरपद’ कहते है । समस्त पद के दोनो पदों को अलग-अलग करने की प्रक्रिया को ‘समास-विग्रह’ कहते है । हिन्दी-व्याकरण के अनुसार समास के छ: भेद माने जाते है:-

  1. अव्ययीभाव समास – इसमे प्रथमपद प्रधान होता है ।
  2. तत्पुरुष समास – इसमे उतरपद प्रधान होता है ।
  3. कर्मधारय समास – इसमे पुर्वपद तथा उतरपद दोनो प्रधान होते है ।
  4. द्विगु समास – इसमे पुर्वपद संख्यावाचक होता है ।
  5. द्वन्द्व समास – इसमे दोनो पद प्रधान होते है और संयोजक लग जाता है।
  6. बहुब्रीहि समास – इसमें दोनो पद मिलकर एक अन्य पद का निर्माण करते है ।

समास (Compound) के भेद परिभाषा एवं उदाहरण

विधार्थिओ के लिए आसानी से याद रखने के लिए

समास को आसनी से पहचानने का तरीका

प्रथम : प्रथमपद प्रधान      – अव्ययीभाव समास

उतर : उतरपद प्रधान       – तत्पुरुष, कर्मधारय तथा द्विगु समास

अन्य: तीसरा पद प्रधान     – बहुब्रीहि समास

सामासिक शब्द

समास के नियमानुसार जब कोई शब्द बनता है उसे सामासिक शब्द कहते है । और इस प्रक्रिया में बने शब्द को समस्तपद कहते है । समास होने के बाद विभक्तियों के चिन्ह (उपसर्ग ) आदि लुप्त हो जाते है । जैसे- राजमंत्री

समास विग्रह

समस्तपद के दोनो पदों को अलग-अलग करने की क्रिया को ‘समास-विग्रह’ कहा जाता है । जैसे- पीताम्बर

पुर्वपद और उत्तरपद

समास दो पदों के मिलने से बनता है, प्रथम पद को पुर्वपद तथा दुसरे पद को उत्तरपद कहते है । जैसे-रसोईघर

समास के भेद (Kinds of Compound Smas)

इनके छ: भेद है

1 अव्ययीभाव समास

इस समास में पहला पद (पुर्वपद) प्रधान हो और तथा समस्त पद (सामासिक अव्यय ) क्रिया विशेषण  हो अव्ययीभाव समास कहते है । जैसे- यथाशक्ति, यथानुरुप, प्रतिदिन इत्यादि ।

इनके कुछ उदाहरण :

यथा + शक्ति          = यथाशक्ति      शक्ति के अनुसार

यथा + अनुरुप        = यथानुरुप

प्रति + दिन             = प्रतिदिन

प्रति + क्षण            = प्रतिक्षण

आ + मरण            = आमरण      मृत्यु तक

आ + जन्म            = आजन्म        जन्म से लेकर

अनु + कुल           = अनुकुल

यथा + क्रम           = यथाक्रम

पेट + भर             = भरपेट

प्रति + कुल          = प्रतिकुल

भर + सक           = भरसक

अभुत + पुर्व        = अभुतपुर्व     जो पहले कभी नही हुआ

हाथ + हांथ           = हांथोंहाथ

दिन + दिन           =दिनोंदिन

हर + घडी            = हरघडी

प्रति + पल            = प्रतिअपल      हर पल

आ + कारण         = अकारण      बिना कारण के

यथा + शीघ्र          =यथाशीघ्र      शीघ्रता से

यथा + समय         =यथासमय     समय के अनुसार

नि:+ विकार         =निर्विकार     विना विकार के

नि: + विवाद        = निर्विवाद     विना विवाद के

तत्पुरुष

जिस समास के उत्तर पद प्रधान हो त्तथा सामासिक शब्द के बीच का कारक चिन्ह लुप्त हो तत्पुरुष समास कहा जाता है । तत्पुरुष समास के भेद निम्न है:-

(a) कर्म-तत्पुरुष

जिस समास में कर्म कारक की विभक्ति ‘को’ का लोप हो वहां कर्म तत्पुरुष लगता है । जैसे-

जेबकट         – जेब को काटने वाला

यशप्राप्त        – यश को प्राप्त

सर्वभक्षी         – सब को भक्षण करने वाला

मनोहर          – मन को हरने वाला

गिरिधर          – गिरि अर्थात पर्वत को धारण करने वाला यानी श्रीकृष्ण

माखनचोर       – माखन को चुराने वाला (श्रीकृष्ण)

शत्रुघन            – शत्रु को हत्या करने वाला ( लक्ष्मण)

ग्रन्थकार         – ग्रन्थ को करने वाला

देशगत           – देश को गया हुआ

गृहगत           – गृह को आया हुआ

मुंहतोड         – मुंह को तोडने वाला

(b) करण -तत्पुरुष

जिस समास में करण कारक की विभक्ति ‘से’ का लुप्त हो वहां करण तत्पुरुष लगता है । जैसे-

कष्टसाध्य              = कष्ट से साध्य

हस्तलिखित          = हस्त से लिखित

मनाचाहा              = मन से चाहा

मदांध                   = मद से अंधा

पददलित              = पद से दलित

शोकाकुल             = शोक से व्याकुल

रोगाग्रस्त              = रोग से ग्रस्त

रेखांकित              = रेखा से अंकित

शराहत                = शर से आहत

मनमुताबिक         = मन से मुताबिक

धनहीन                = धन से हीन

मदमाता               = मद से माता

आंखोदेखी            = आंखों से देखी

रसभरा                 = रस से भरा

रक्तरंजित             = रक्त से रंजित

मनगढंत               = मन से गढंत

मुंहमांगां               = मुह से मांगा

(c) सम्प्रदान तत्पुरुष

जिस समास में सम्प्रदान कारक की विभक्ति ‘के लिए’ का लुप्त हो वहां करण सम्प्रदान तत्पुरुष लगता है । जैसे-

बलिपशु                    = बलि के लिए पशु

युध्दभुमि                   = युध्द के लिए भुमि

विधालय                    = विधा के लिए आलय

रसोईघर                   = रसोई के लिए घर

गुरु-दक्षिणा               = गुरु के लिए दक्षिणा

सभाभवन                 = सभा के लिए भवन

सत्याग्रह                   = सत्य के लिए आग्रह

भोजनालय               = भोजन के लिए आलय

पुस्तकालय              = पुस्तक के लिए आलय

प्रयोगशाला              = प्रयोग के लिए शाला

धर्मविहिन                = धर्म से विहिन

देवालय                   = देव के लिए आलय

मार्ग-व्यय                = मार्ग के लिए व्यय

क्रीडा-क्षेत्र               = क्रीडा के लिए क्षेत्र

पाठशाला               = पाठ के लिए शाला

मालगाडी               = माल के लिए गाडी

परीक्षा भवन           = परीक्षा के लिए भवन

(d) अपादान तत्पुरुष

इस समास में अपादान कारक की विभक्ति ‘से’ का लुप्त हो वहां करण तत्पुरुष लगता है । जैसे-

ऋणमुक्त               = ऋण से मुक्त

पदच्युत                 = पद से च्युत

जन्मांध                  = जन्म से अंधा

भयभीत                = भय से भीत

धर्मभ्रष्ट                 = धर्म से भ्रष्ट

अन्नहीन                = अन्न से हीन

विधारहित             = विधा से रहित

विधाहीन               = विधा से हीन

देश-निकाला         = देश से निकाला

रोगमुक्त               = रोग से मुक्त

कामचोर               = काम से चोर

सेवामुक्त               = सेवा से मुक्त

स्वादहीन               = स्वाद से हीन

पुत्रहीन                  = पुत्र से हीन

धनहीन                  = धन से हीन

पापमुक्त               = पाप से मुक्त

फ़लहीन               = फ़ल से हीन

(e) सबंध तत्पुरुष

जिस समास में सबंध कारक की विभक्ति ‘का’ ‘ की’, ‘के ‘ का लुप्त हो वहां करण सबंध तत्पुरुष  लगता है । जैसे-

राजकुमार               = राजा का कुमार

राष्ट्रपति                  = राष्ट्र का पति

पवनपुत्र                  = पवन का पुत्र

सेनापति                 = सेना का पति

कन्यादान               = कन्या का दान

गंगाजल                 = गंगा का जल

कार्यकर्ता               = कार्य का कर्ता

पराधीन                  = पर के अधीन

वाचस्पति               = वाच: (वाणी) का पति

अछुतोध्दार            = अछुतों का उध्दार

रामानुज                 = राम का अनुज

बैलगाडी               = बैलों की गाडी

घुडदौड                = घोडों की दौड

दीनानाथ              = दीनों के नाथ

अमचुर                = आम का चुर

राजदरबार           = राजा का दरबार

चायबगान            = चाय के बगान

देशरक्षा               = देश की रक्षा

चरित्रहीन             = चरित्र से हीन

(f) अधिकरण तत्पुरुष

जिस समास में सबंध कारक की विभक्ति ‘में ‘ पर’  का लुप्त हो वहां करण अधिकरण तत्पुरुष  लगता है । जैसे-

कलाप्रवीण           = कला मे प्रवीण

कविश्रेष्ठ               = कविओ में श्रेष्ठ

नराधम                = नरों मे अधम

पुरुषोतम             = पुरुषों में उतम

शरणागत             = शरण में आगत

दानवीर               = दान में वीर

गृहप्रवेश             = गृह में प्रवेश

युधिष्ठिर              = युध्द मे स्थिर

कृषिप्रधान          = कृषि में प्रधान

शोकमग्न             = शोक में मग्न

घुडसवार           = घोडे पर सवार

कानाफ़ुसी         = कानों में फ़ुसी यानी फ़ुसफ़ुसाहट

आपबीती           = अपने पर बीती

शिलालेख          = शिला पर लेख

धर्मवीर             = धर्म मे वीर

3  कर्मधारय समास

जिस समास के दोनो पदों में परस्पर विशेष्य-विशेषण अथवा उपमेय-उपमान सम्बन्ध हो और दोनो पदों में एक ही कारक की विभक्ति आए , कर्मधारय समास कहते है । जैसे-

सदगुण            = सत है जो गुण

पुरुषोतम         =उतम है जो पुरुष

नीलगाय          = नीली है जो गाय

चन्द्रमुख          = चन्द्र के समान है जो मुख

अधमरा           = आधा है जो मरा

इनके आधार पर कर्मधारय समास  के दो भेद माने जाते है :

(अ) विशेषतावाचक:- जहां विशेष्य-विशेषण का सबंध की सुचना दोनो पदों में होती है विशेषतावाचक कहलाता है । जैसे:-

नीलाम्बर               = नीला है जो अम्बर

महाजन                 = महान है जो जन

महापुरुष                = महान है जो पुरुष

सदगुण                  = सत है जो गुण

कटुक्ति                 = कटु है जिसकी उक्ति या कटु है जो उक्ति

खाधान्न                  = खाध है जो अन्न

परमौषध                = परम है जो औषध

भलमानस             = भला है जो मानस

(ब) तुलनावाचक :- जब सामासिक पद में उपमेय-उपमान का सम्बन्ध हो तो तुलनावाचक कहलाता है । जैसे-

कमलनयन        = कमल के समान नयन

लौहपुरुष           = लौहे के समान पुरुष

चन्द्रमुख            = चन्द्रमा क्र समान मुख

कनकलता         = कनक के समान लता

चन्द्र-धवल         = चन्द्र की भांति धवल

4  द्विगु समास

समुह या समहार का बोध कराने वाला समास द्विगु समास कहा जाता है । इसका पुर्व पद संख्यावाचक तथा दोनो पदों के बीच विशेषण-विशेष्य का सबंध होता है । जैसे:-

द्विगु                  = दो गायों का समाहार

त्रिभुवन             = तीन भुवनों का समुह

त्रिवेणी               = तीन वेणियों का समाहार

चतुष्पदी             = चार वेदों का समाहार

पंचतत्व               = पांच तत्वो का समुह

त्रिफ़ला             = तीन फ़लों का समुह

नवरत्न              = नौ रत्नों का समुह

सप्तर्षि              = सात ऋषियों का समुह

पंचवटी             = पंच वट का समाहार

सतसई             = सात सौ दोहों का समुह

चौपाई              = चार पदों का समुह

चौराहा           = चार रास्तो का समाहार

पंसेरी              = पांच सेरों का समुह

अठन्नी             = आठ आनों का समुह

त्रिकोण            = तीन कोणों का समाहार

नवरात्रि           = नौ रात्रों का समुह

त्रिनेत्र               = तीन नेत्रों का समाहार

5   द्वन्द्व समास

जिसके दोनो पद प्रधान हो तथा समास-विग्रह करने पर दोनो के बीच ‘और’  ‘तथा’ ‘एवं’ ‘ या’ ‘अथवा’ लगा हो द्वन्द्व समास  कहलाता है । जैसे-

सीता-राम          = सीता और राम

राजा-रंक           = राजा और रंक

अन्न-जल            = अन्न और जल

ऊंच-नीच          = ऊंच और नीच

माता-पिता         =माता और पिता

सुख-दु:ख          = सुख और दु:ख

थोडा-बहुत        = थोडा और बहुत

पाप-पुण्य          = पाप और पुण्य

नर-नारी            = नर और नारी

दाल-भात          =दाल और भात

राम-कृष्ण         = राम और कृष्ण

बेटा-बेटी           = बेटा और बेटी

देश-विदेश        = देश और विदेश

अपना-पराया      = अपना और पराया

द्वन्द्व समास के तीन भेद है- – इत्येत्तर द्वंद  , समाहार द्वंद , और वैकल्पिक द्वंद। जैसे:

गुण-दोष             = गुण और दोष

भाई-बहन           = भाई और बहन

राधाकृष्ण            = राधा और कृष्ण

पाप-पुण्य            = पाप या पुण्य

भला-बुरा            = भला या बुरा

हानि-लाभ          = हानि या लाभ

सेठ-साहुकार      = सेठ और साहुकार

6   बहुब्रीहि समास

इस समास के कोई भी पद प्रधान नही होता और दोनो पद मिलकर किसी अन्य अर्थ की ओर संकेत करते है ।

दुसरे शब्दो में, वह समास जिसके पुर्व पद और उत्तर पद दोनो में से कोई भी पद प्रधान नही होता और दोनो पद आपस मे मिलकर किसी अन्य अर्थ का निर्माण करते है , जो विशेषण होते है, बहुब्रीहि समास कहते है । जैसे-

गजानन           = गज के समान आनन जिसका अर्थात गणेश जी

लम्बोदर         = लम्बा हो उदर जिसका अर्थात गणेश जी

नीलकंठ        = नीला है जिसका कंठ जिसका अर्थात शिव

चन्द्रशेखर      = चन्द्र है शेखर (मस्तक) पर जिसके अर्थात शंकर जी

चतुर्मुख          = चार है मुख जिसके अर्थात ब्रह्ना जी

चतुर्भुज           = चार है भुजाएं जिसके अर्थात विष्णु जी

नील-कंठ        = नीला है कंठ जिसका अर्थात शंकर जी

गिरधर            = गिरि को धारण करने वाला अर्थात कृष्ण जी

त्रिनेत्र              = तीन है नेत्र जिसके अर्थात शंकर जी

चतुरानन         = चार ऐ आनन जिसके अर्थात ब्रह्ना जी

चक्रपाणि        = चक्र है पाणि में जिसके अर्थात ब्रह्ना जी

दशानन           = दश है आनन जिसके अर्थात रावण

वीणापाणि       = वीणा है जिसके कर में अर्थात सरस्वती जी

कर्मधारय और बहुव्रिहि समास मे अन्तर

कर्मधारय  समास में दोनो पद परस्पर विशेष्य-विशेषण अथवा उपमेय-उपमान का सम्बन्ध होता है और दोनो पदों में एक ही कारक की विभक्ति आती है जबकि बहुव्रिहि समास में  कोई भी पद प्रधान नही होता और दोनो पद मिलकर किसी अन्य अर्थ की ओर संकेत करते है ।

अब हम इसे समास-विग्रह करके उदाहरण के द्वारा समझने की कोशिश करेगें। जैसे-

महाजन में – महान विशेषण है, तथा जन विशेष है

त्तथा, कमलनयन में- कमल उपमेय है और नयन उपमान है ।

ये देनो कर्मधारय समास के उदाहरण है।

बहुव्रीहि समास में समस्त पद किसी संज्ञा और विशेषण का काम करते है । जैसे- पीतामबर   – पीला है अम्बर जिसका वह अर्थात श्रीकृष्ण

द्विगु और बहुव्रिहि समास मे अन्तर:

इन दोनो में मुख्य अंतर यह है कि: बहुव्रीहि समास में समस्त पद किसी संज्ञा या विशेषण का काम करते है , जबकि द्विगु समास प्रथम पद संख्यावचक होता है और उत्तर पद विशेषण-विशेष्य होता है ।

इन दोनो के अंतर को हम समास-विग्रह से समझते है:-

दशानन       – दश है आनन ( सिर) जिसके वह अर्थात लंकापति रावण – (बहुव्रिहि समास)

नीलकंठ  – नीला है कंठ जिसका वह अर्थात महादेव ( शंकर)  -(बहुव्रिहि समास)

त्रिभुज   – तीन भुजाओ का समुह -(द्विगु समास)

सप्तसिंधु  – सात सिंधुओ का समुह  – (द्विगु समास)

संधि और समास में अन्तर

संधि की परिभाषा: दो वर्णों के परस्पर मिलन से जो विकार उतपन्न होता है, उसे संधि कहते है । जैसे- पुस्तक + आलय   = पुस्तकालय

समास की परिभाषा : ये दो शब्दों के मेल से बनता है और विभक्ति प्राय: लुप्त हो जाता है ।

दोनो ही दो शब्दों या वर्णो के मेल से बनता है, लेकिन फ़िन भी उन दोनो में जो अन्तर है:-

संधि वर्णो के मेल से बनता है जबकि समास शब्दों के मेल से बनता है।

संधि में वर्णो के मेल से वर्ण परिवर्तन होता है, जबकि समास में कुछ ऎसा होता है। इसमें दो पदों के बीच कारक-चिन्हों लुप्त हो जाते है । जैसे:-

शिक्षा + अर्थी    = शिक्षार्थी  संधि

राजमंत्री           = राजा का मंत्री  समास

वस्तुनिष्ठ प्रश्न प्रतियोगिता परीक्षा के अनुरूप:

Q.1, बनवास में कौन सा समास है ?

(A) तत्पुरुष           (B) कर्मधारय

(C) द्वन्द्व                (D) बहुव्रीहि

Q.2, पंचवटी –

(A) द्विगु                (B) बहुव्रीहि

(C) तत्पुरुष           (D) कर्मधारय

Q.3, चन्द्रशेखर में कौन सा समास है ?

(A) बहुव्रीहि          (B) कर्मधारय

(C) द्वन्द्व                (D) तत्पुरुष

Q.4, रात-दिन  – समास है ?

(A) द्वन्द्व                (B) बहुव्रीहि

(C) तत्पुरुष           (D) कर्मधारय

Q.5, भाई-बहन  – समास है ?

(A) द्वन्द्व                (B) बहुव्रीहि

(C) तत्पुरुष           (D) कर्मधारय

Q.6, समास का शाब्दिक अर्थ क्या है ?

(A) संक्षिप्त           (B) विग्रह

(C) विसतृत          (D) विच्छेद

Q.7, ‘ देवासुर’ में कौन समास है ?

(A) द्वन्द्व                (B) बहुव्रीहि

(C) तत्पुरुष           (D) कर्मधारय

Q.8, ‘ पाठशाला ‘ में कौन समास है ?

(A) तत्पुरुष           (B) बहुव्रीहि

(C) द्वन्द्व                (D) कर्मधारय

Q.9, हिन्दी वर्णमाला में स्वरों की संख्या कितनी है ?

(A) ग्यारह            (B) नौ

(C) छब्बीस          (D) पांच

Q.10, संधि कैसे बनता है ?

(A) दो वर्णो के मेल से     (B) दो शब्दो के मेल से

(C) दो विकर के उतपन्न से  (D) अन्य

Q.11, ‘ कमल के समान नयन ‘ में कौन समास है ?

(A) कर्मधारय       (B) बहुव्रीहि

(C) द्वन्द्व                (D) तत्पुरुष

Q.12,  निम्न में से कौन -सा अव्ययीभाव समास का उदाहरण है ?

(A) समय के अनुसार        (B) पीला है वस्त्र जिसका

(C) रण में कौशल             (D) सत्य के लिए आग्रह

किस शब्द मे अव्ययीभाव समास नही है ?

Q.13, (a) आजीवन     (b) आजन्मा

(c) घुडसवार     (d) हरपल

Q.14, (a) चतुर्भुज        (b) यथासांख्य

(c) आमरण       (d) भरपेट

Q.15, (a) हरेक          (b) महाजन

(c) प्रत्येक        (d) भरसक

निम्न शब्दों में कौन-सा समास है ?

Q.16, पंसेरी

(a) कर्मधारय       (b) द्विगु

(c) द्वन्द्व                (d) तत्पुरुष

Q.17, पंचानन

(a) कर्मधारय       (b) बहुव्रीहि

(c) द्वन्द्व                (d) तत्पुरुष

Q.18, समास के प्रकार .  है ?

(a) अव्ययीभाव , तत्पुरुष        (b) कर्मधारय, द्विगु ब

(c) द्वन्द्व , हुव्रीहि                    (d) उपरोक्त सभी

Q.19, आजन्म, प्रत्येक, बेअसर, सस्नेह में कौन-सा समास है ?

(a) कर्मधारय       (b) बहुव्रीहि

(c) अव्ययीभाव    (d) तत्पुरुष

Q.20, द्वन्द्व समास में —– पद प्रधान होते है ?

(a) पुर्व                 (b) उतर

(c) दोनो              (d) इनमे से कोई नही

Q.21, नर-नारी, वेद-पुराण में— समास है?

(a) कर्मधारय       (b) बहुव्रीहि

(c) द्वन्द्व                (d) तत्पुरुष

Q.22, नीलकमल में विशेषण-विशेष्य सबंध है तो इसमें—है?

(a) द्वन्द्व                (b) बहुव्रीहि

(c) कर्मधारय       (d) तत्पुरुष

Q.23, यशप्राप्त  = यश को प्राप्त । इसमें विभक्ति का लोप हो रहा है, तो कौन-सा समास है ?

(a) कर्म तत्पुरुष            (b) सम्प्रदान तत्पुरुष

(c) अपादान तत्पुरुष      (d) करण तत्पुरुष

Q.24, स्नानघर = स्नान के लिए घर । इसमें ‘के लिए’ विभक्ति का लोप हो रहा है, तो कौन-सा समास है ?

(a) कर्म तत्पुरुष            (b) सम्प्रदान तत्पुरुष

(c) अपादान तत्पुरुष      (d) करण तत्पुरुष

Q.25, तिरंगा, चौमासा, चौराहा, सप्तर्षि में कौन सा समास है ?

(a) द्विगु             (b) बहुव्रीहि

(c) द्वन्द्व                (d) तत्पुरुष

Q.26, ——–शब्द में बहुव्रीहि समास नही है ?

(a) चतुरानन         (b) दशानन

(c) त्रिलोचन          (d) त्रिलोक

Q.27, मृत्युंजय अर्थात मृत्यु को जीतने वाला अर्थात शंकर । इसमें कौन समास है ?

(a) द्विगु               (b) बहुव्रीहि

(c) द्वन्द्व                (d) तत्पुरुष

Q.28, कर्मधारय समास ——— में नही है ?

(a) पवनचक्की         (b) दहीबडा

(c) मधुमक्खी           (d) सप्ताह

Q.29, —— समास में दोनो पद गौण होते है। इसमे अन्य पद ही प्रधान होते है ।

(a) बहुव्रीहि          (b) द्विगु

(c) द्वन्द्व                (d) तत्पुरुष

Q.30, बारहसिंगा में समास है ?

(a) द्वन्द्व              (b) द्विगु

(c) बहुव्रीहि        (d) तत्पुरुष

Q.31, वनमानुष में समास है ?

(a) द्वन्द्व              (b) कर्मधारय

(c) बहुव्रीहि        (d) तत्पुरुष

Q.32, सिरदर्द में समास है ?

(a) तत्पुरुष        (b) कर्मधारय

(c) बहुव्रीहि        (d) तत्पुरुष

Answer Sheet

13. (C) 14. (A) 15. (b) 16.  (B) 16.  (B) 17.  (D) 18.  (c) 19.  (c) 20.  (c) 21.  (c)
22. (a) 23. (b) 24. (a) 25. (d) 26. (d) 27. (d) 28. (a) 29. (c) 30. (b) 31. (a)
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