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Gudi Padwa 2020- विजय पर्व गुड़ी पड़वा का पौराणिक महत्व

गुड़ी पड़वा (Gudi Padwa) का त्यौहार क्यों मनाते है

Gudi Padwa-आज गुड़ी पड़वा का त्यौहार है . यह त्यौहार हर साल 25 मार्च को बुधवार के दिन ही मनाया जाता है. इसका मनाने का बिशेष अर्थ होता है. गुड़ी का अर्थ होता है विजय पर्व यानि विजय का उत्सव और पड़वा का अर्थ होता है प्रतिपदा .

अगर हिंदी महीने के अनुसार देखा जाय तो यह त्यौहार चैत्र माह के शुक्ल पक्ष को प्रतिपदा के दिन इसे मनाया जाता है. Therefore इस त्यौहार को विजय पर्व या विजय उत्सव भी कह सकते है . Because क्योकि इस दिन भगवन राम ने बालि पर विजय पाई थी .



Therefore इसलिए इस दिन घर को अच्छी तरह से सजाकर भगवान श्रीराम , नवदुर्गा तथा हनुमान जी को विधिपूर्वक नैवेध चढ़ाकर पूजा की जाती है .

गुड़ी पड़वा का अर्थ क्या है

गुड़ी पड़वा का अर्थ है विजय उत्सव और पड़वा का अर्थ होता है प्रतिपदा . इस पर्व को दक्षिण भारत में विजय दिवस के रूप में मनाते है Because क्योकि वानर राज बालि के आतंक से सभी को मुक्ति जो मिली है . भगवान् राम ने बालि को मार कर विजय पाई थी, जिसे गुड़ी कहा जाता है .

आज के दिन दक्षिण भारत के हर घर में ध्वज पताका को बंधनवार से सजाते है . महाराष्ट्र में भी इस त्यौहार को हर घर में मनाया जाता है . और हर घर में विजय पताका सजाया जाता है . ऐसी भी मान्यता है की इसी दिन ब्रह्मा जी ने सृष्टि की रचना भी की थी और इसी दिन भी सतयुग की शुरुआत भी हुई थी.

गुढीपाडवा पूजा विधि

गुढी पाडवा का आरम्भ 24 मार्च दिन मंगलवार को 2 बजकर 57 मिनट से होकर 25 मार्च बुधवार 5 बजाकर 26 मिनट तक रहेगा . Therefore इस बीच श्रद्धालु पूजा अर्चना कर सकते है . आंध्रप्रदेश, कर्नाटक और महाराष्ट्र में हर्ष और उल्लास से मनाते है .

गुड़ी पड़वा (Gudi Padwa) का महत्व क्या है?

दक्षिण भारत का सम्बन्ध रामायण काल से है . एक मान्यता के अनुसार जब लंकापति रावण ने माँ सीता का हरण करके लंका ले गए , तो भगवान राम को रावण से युध्द करने के लिए एक विशाल सेना की आवश्यक थी , इसलिए (Therefore) उन्होंने वानरों के राजा बालि को मारकर सुग्रीव से मित्रता किया . इससे दक्षिण भारत के लोगों को बालि से मुक्ति मिली और वह दिन प्रतिपदा ही था  . इसलिए विजय उत्सव के रूप में  विजय पताका फहराया जाता है .

एक दूसरी कथा के अनुसार राजा शालिवाहन ने मिटटी की सेना बनाकर उसमे जान फूंक दिया था और इस प्रकार दुश्मनो का खात्मा किया था . इसी दिन शालिवाहन शक का आरम्भ भी होता है .

किसान भी बहुत खुश नजर आते है क्योकि अच्छी फसल होने के उपलक्ष में अन्नदेवता को धन्यवाद भी देते है और उससे आशीर्वाद मांगते है की हमारा भंडार धन-धान्य से हमेशा भरा रहे .

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