Ayodhya Ki Rajkumari Suriratna- कौन थी और उनके अयोध्या से क्या सबंध है

Ayodhya Ki Rajkumari Suriratna- कौन थी और उनके अयोध्या से क्या सबंध है

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Ayodhya Ki Rajkumari Suriratna ki Kahani Hindi

Rajkumari Suriratna : उत्तर प्रदेश के फ़ैजाबाद जिले में स्थित अयोध्या नगरी को सभी जानते है, क्योकि यह भगवान राम की जन्मभुमि है, जो विष्णु भगवान के सातवें अवतार थे । जिनका वाल्यकाल अयोध्या में बीता । लेकिन अयोध्या शिर्फ़ भगवान राम की ही जन्मभुमि नही है, अयोध्या राजकुमारी सुरीरत्ना (Rajkumari Suriratna) की भी जन्मभुमि है ।

जिनका भी जन्म अयोध्या में ही हुआ था । भगवान राम वनवास गए और चौदह बर्ष बिताकर वापस आ गये, लेकिन राजकुमारी सुरीरत्ना (Rajkumari Suriratna)गई तो फ़िर वापस नही आई ।

राजकुमारी सुरीरत्ना की कहानी-Princess Suriratna Story in Hindi

राजकुमारी सुरिरत्ना कोरिया की महारानी थी । जिसका जन्म अयोध्या के राजधराने में हुआ और वही पली बढी । एक मान्यता के अनुसार अयोध्या के राजा दशरथ ने भगवान राम को चौदह बर्ष का वनवास दिया था ,जिसे पुरा करके वह वापस अयोध्या लौट आया , लेकिन राजकुमारी सुरिरत्ना जब गई, तो वो वापस नही लौटी और वही का बनकर रह गयी ।

दक्षिण कोरिया के पौराणिक किवदन्ती के अनुसार आज से करीब दो हजार बर्ष पुर्व यानी 48वी सदी में अयोध्या की राजकुमारी का विवाह कोरिया के करक वंश के राजा किम सोरो के साथ हुआ था । उस सम्य वो 16 बर्ष की राजकुमारी थी ।

धर्म के प्रचारप्रसार करने गई थी सुरीरत्ना

ऎसा मानना है कि लोग पहले धर्म के प्रचार करने जाया करते थे, इसलिए सुरीरत्ना घुम-घुम कर धर्म का प्रचार करने कई देशों में गई थी । जब वो द्क्षिण कोरिया के किमहये शहर गई थी। जहां उसकी मुलाकत किम सोरो से हुआ और उसे उससे प्यार हो गया और वे दोनो शादी के बंधन में बंध गए।

फ़िर उन्होने अपना नाम बदलकर सुरीरत्ना से हियो ह्वांग रख लिया ।

राजकुमारी सुरीरत्ना से हियो ह्वांग का सफ़र ( Rajkumari Suriratna to Hio Hwang Ho)

इतिहास बताता है कि राजकुमारी सुरीरतना समुद्री मार्ग के रास्ते से नाव पर बैठकर दक्षिण कोरिया के ग्योंगसांग प्रांत में स्थित किमहये शहर आई थी, और पहचान के रुप में उन्होने अपने साथ एक शिला यानी पत्थर लेके आई थी, हो सकता है पहचान के लिए लाई हो या नाव में संतुलन बनाए रखने के लिए लाई हो ।

लेकिन कारक वंशज के लोगों ने वो पत्थर आज भी सहेज कर रखा गया है, इतिहास इस बात का गवाह है । जो मरणोपरांत उसके कब्र पर रखी गई है ।

सपने में भगवान ने दर्शन दिया था

कोरिया के पौराणिक ग्रन्थ ” साम कुक युसा” में में ऎसा वर्णित है, कि राजकुमारी के पिता जब गहरी निन्द्रा में थे, तब भगवान उसके सपने में आकर बताया कि तुम अपनी पुत्री के वर के लिए चिन्ता मत करो, इसका वर शादी के लिए सात-समुन्द्र दुर में इसका इन्तजार कर रहा है, आप केवल इसे वहां भेज दो ।

इसके पहले राजकुमारी के पिता अपने पुत्री के शादी के लिए बहुत चिन्तित रहते थे । फ़िर अगले ही दिन राजा ने अपने पुत्र और पुत्री दोनो के कोरिया भेज दिया । और इस प्रकार राजकुमारी किमहये शहर पहुंचकर  राजकुमार से मिलकर सपने वाली पुरी बात बताई तो वे तुरन्त राजी हो गया और इस प्रकार सुरीरत्ना का विवाह किम सोरो से समपन्न हुआ।

कोरिया का नामकरण

दक्षिण कोरिया का यह पौराणिक मंदारिन भाषा में लिखित है, जो चीनी भाषा से मिलते-जुलते है । उसमे यह भी लिखा है कि इन राजवंशों के नाम से ही कोरिया का नाम कोरिया पडा, जिन्हे कारक राजवंश कहते है ।

कारक वंश का विस्तार

स्थानीय लोगों का ऎसा मानना है कि कारक वंश ने कोरिया में सात सौ बर्ष तक तक राज किया और कोरिया का बहुत विकास किया । इस राजवंश के लोग कोरिया के अलावा विश्व के कई देशों में उच्चे पद पर आसीन है ।

कारक राजवंशों ने इस दरम्यान विभिन्न राजवंशों का निर्माण किया। वैसे तो कोरिया के इतिहास में कई महारानियों का नाम आता है, लेकिन सुरीरत्ना सबमें सर्वोपरि है, ज्यादा आदरणीय और पवित्र है, क्योकिं इनका सबंध भगवान राम की जन्म-भूमि अयोध्या से सबंध रखता है ।

किम देई जुंग ( राष्ट्र्पति) हियो जियोंग (पुर्व प्रधानमंत्र)  तथा जोंग पाल किम भी कारक राजवंश से ही है । वर्तमान समय में कोरिया की आधा से ज्यादा आबादी अपने को कारक राजवंश के ही है । इसलिए कोरिया के लोग अयोध्या को अपना ननिहाल मानते है ।

अयोध्या ननिहाल है कोरियाई का

अयोध्या केवल भगवान राम की जन्म-भूमि ही नही यह कोरियाई लोगों का ननिहाल भी है । जब सुरीरत्ना का विवाह किम सोरो से हुआ और उसके द्वारा उतपन्न संतान का अयोध्या से खाश लगाव है यो कहें तो उसका ननिहाल अयोध्या है ।

सुरीरत्ना को श्रध्दाजंलि

कोरिया के ६० लाख लोग अपने को कारक वंशज को मानते है और अपने राजमाता की याद में हर साल लगभग फ़रवरी-मार्च महिनें में कोरियाई लोगों अयोध्या में उसकी स्मृति पर श्रध्दाजंलि मनाने आते है ।

अयोध्या में सरयू नदी के किनारे राजकुमारी की याद में एक पार्क बनाया गया है।

चिन्ह में समान्ता

सुरीरत्ना ने जो पत्थर लेके गई थी उसमे दो मछलियां अंकित है, जो कोरिया और भारत के राजवंशो मे सांस्कृतिक समानता दर्शाता है । अयोध्या के पुरानिक राजवंश के मछली के चिन्ह थे, इससे सावित होता है कि ये तथ्य सत्य है ।

भारत और कोरिया में सबंध

वैसे भारत और कोरिया में व्यापरिक सबंध है, तत्कालिन प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी और कोरिया के प्रधानमंत्री के बीच आपसी मुदे हुए । लेकिन भारत और कोरिया के बीच रिश्तेदारी को लेकर इससे रिश्ते और भी मजबुत होते है ।

कोरिया के लोग इस बात को लेकर बहुत उत्साहित है , कि हमारी दोस्ती भारत जैसे देश से है ।

सुरीरत्ना के मन्दिर का निर्माण

जब कोरिया के प्रधानमंत्री भारत के दौरे पर आए थे, अखिलेश यादव उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री थे, तब उसके सामने यह प्रस्ताव माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के पास किया गया, कि अयोध्या सुरीरत्ना के नाम से एक भव्य मन्दिर का निर्माण किया जाएगा ।

भारतीय इतिहासकार क्या बताते है :

भारत के पौराणिक इतिहास में ऎसा कोई जिक्र नही है । भगवान राम का सुरीरत्ना से क्या सबंध थे ? इसका कोई उल्लेख नही है ।

यह प्रमाण केवल कोरियाई इतिहास में ही वर्णित है । और कोई भी प्रमाण उपलब्ध नही है । उत्तर प्रदेश पर्यटक विभाग के ब्रोसर में सुरीरत्ना का जिक्र है । लेकिन इतिहासकार इस बात को मिथ्या मानते है ।

राजकुमारी सुरीरत्ना का निधन ( Rajkumari Suriratna)

कोरिया के इतिहास के अनुसार 57 बर्ष की आयु में राजकुमारी सुरीरत्ना का निधन हो गया और इसका कब्र गिमहे शहर में स्थित है ।

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