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Who is Holika in Hindi-होलिका कौन थी और उसे क्यों जलाया जाता है?

होलिका [Holika]कौन थी?

होलिका [Holika] दैत्यराज हिरण्यकश और हरिण्यकशिपु के लाडली बहन थी | उसने ब्रह्मदेव की बहुत तपस्या की | जिससे ब्रह्मा जी ने खुश होकर उसे वरदान मांगने को कहा तो उसने ब्रह्मा जी से बोली भगवन आप मुझे ऐसा वर दान दीजिये जिसे ओढ़ लेने पर अग्नि मुझे नहीं जला सके | तो भगवन ने उसे तथास्तु कहकर अंतर्ध्यान हो गए |

होलिका किसकी बेटी थी?

होलिका असुरराज कश्यप की पुत्री एवं हिरण्याक्ष और हिरण्यकश्यप तथा भक्त प्रह्लाद की बुआ थी | एक राक्षसी होते हुए भी उन्होंने कठिन तप करके ब्रह्मा जी से वरदान प्राप्त की थी |

होलिका क्यों जली थी?

ब्रह्मा जी ने होलिका को वरदान देते वक्त ये कहा था की इसका उपयोग मानव कल्याण के लिए करना है | लेकिन नहीं | उन्होंने इस अनमोल वरदान को भगवान के विरुद्ध ही प्रयोग किया | इसलिए उस वरदान का फल निरर्थक रहा  और जल गई |

होलिका [Holika] की मार्मिक प्रेम कहानी क्या है ?

होलिका को है सभी एक राक्षसी के रूप में ही जानते है , लेकिन हिमाचल में उसकी कहानी घर घर में लोकप्रिय है | वह एक बेवस प्रेमिका थी | और अपने पति से मिलने के खातिर उसने मौत को गले लगाया | वह हिरण्याक्ष और हिरण्यकश्यप की बहन थी | और इनकी शादी इलोजी के साथ फाल्गुन के पूर्णिमा के दिन होना तय था |

और इधर हिरण्यकश्यप अपने पुत्र प्रह्लाद से बहुत परेशान था | हिरण्यकश्यप बहुत महत्वकांक्षी हो गया था | वह समस्त देश का राजा बनाना चाहता था | लेकिन उसका पुत्र प्रह्लाद उसका बाधक बन रहा था | उसने उसे बहुत यातनाए दी | लेकिन कोई कामयाब नहीं हुआ |

तब उसने बहन होलिका को मदद करने को कही | लेकिन उसने इंकार कर दिया | तब उसने उसे धमकी थी की तेरी शादी नहीं होने देंगे | बेबस होकर उसने भाई की बात मानकर अग्नि में बैठी | जब इलोजी बारात लेकर पहुंचा तब उसे रास्ते में समाचार मिला की होलिका जलकर भस्म हो चुकी है |

होलिका (Holika) के पीछे की क्या कहानी है ?

प्राचीन समय की बात है | कश्यप नाम के राजा थे | उनके पुत्र हिरण्यकश्यप था | उसने हजारों बर्षों तक भगवन ब्रह्मा जी कठिन तपस्या करके ऐसा वरदान प्राप्त कर लिया की उन्हें कोई नहीं मार सकता है , न कोई अस्त्र न शास्त्र , दिन में न रात में आकाश में न पाताल में |

इस वरदान को पाकर उसने खुद को भगवान् समझ बैठा | और अपने समस्त प्रजाजनों को आज्ञा दी की मुझे भगवान जो नहीं बोलेगा उसे मौत के घाट उतर दूंगा | प्रजा सभी डर के मारे जो कहे सो बोलने लगा | लेकिन उसके घर में एक पुत्र ने जन्म लिया वो ब्रह्मा जी के परम भक्त था | उसका नाम प्रह्लाद था | वह सुबह शाम उठते बैठते भगवान् का ही नाम लेता था |

हिरण्यकश्यप अपने पुत्र प्रह्लाद से बहुत परेशान था | उसने उसे बहुत यातनाए दी | उसने अपने सैनिको को आज्ञा दी कि इसे ऊँची पहाड़ी पर से निचे फेक दो अगर नहीं मरे तो हांथी के पैर से कुचलवा दो फिर भी नहीं मरे तो तलवार से वध कर दो |

अंत में उसने अपनी बहन होलिका [Holika] कि मदद ली | उसे पता था कि उसे वरदान प्राप्त है कि अग्नि उसे नहीं जला सकती | इसलिए होलिका ने अपने भाई के कहने पर प्रह्लाद को गोद में अग्नि में बैठ गई | प्रह्लाद को अपने भगवान् पर बहुत भरोशा था | इसलिए भयंकर तूफ़ान आया और चादर उड़कर प्रह्लाद से लिपट गया और होलिका जल गई |

यहाँ पर असत्य पर सत्य कि जीत हुई है | अधर्म पर धर्म की विजय हुई है | इस कहानी से हमें यही सिख मिलती है की विजय आखिर सत्य की ही होती है | सत्य परेशान हो सकता है लेकिन पराजित नहीं |

इसी ख़ुशी में हम सभी होलिका को जलाते है , जिसे हम होलिका [Holika] दहन के नाम से जानते है |

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