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Holika Dahan the legend story about Prahlad in Hindi-होलिका दहन की कहानी

Holika Dahan the legend story -होलिका दहन की कहानी

ग्रीष्म ऋतू में हमारे देश में होली का त्यौहार आता है | और होली त्यौहार के एक दिन पहले होलिका दहन किया जाता है | यानि होली के एक दिन पहले होलिका को जलाया जाता है , जिसे हम सभी भाई होलिका दहन [ Holika dahan] के नाम से जानते है |

Bhakt Prahlad Holika Dahan Story- होलिका दहन और भक्त प्रह्लाद की कहानी

हमारे देश के पौराणिक ग्रंथो के अनुसार पृथ्वी के किसी भाग में हरिण्यकश्यप नामक एक बहुत ही पराक्रमी असुरराज रहता था | उसने ब्रह्मा जी से वरदान प्राप्त करके घमंड से चूर था | वह देवताओं का कट्टर शत्रु था |

उसने शक्ति के घमंड में आकर खुद को भगवान समझने लगा | और जो भी उसे भगवान् नहीं मानता था वह उसे जान से मार डालता था | उसने अपने राज्य में पूजा पाठ सभी बंद कर दिया क्योकि वह जानता था की पूजा पाठ करने से देवताओं को शक्ति मिलती है अन्यथा वे निर्बल हो जायेंगे |

उसने साधू-महात्मा तथा तपस्वी सभी का बहुत परेशान करने लगा | सभी लोग डर के मारे उसे भगवानं कहने लगे |

लेकिन उसी के घर में उसका पुत्र प्रह्लाद भगवान के परम भक्त पैदा हुआ | पहले तो हिरण्यकश्यप ने उसे बहुत समझाया और कहा की मै पुरे जगत का मालिक हूँ | मै भगवान् हूँ | सभी मुझे भगवान् कहते है | तुम भी मुझे भगवान् कहो | लेकिन प्रह्लाद ने उतर दिया -पिताश्री भगवान विष्णु शर्वशक्तिमन है उसके बिना एक पता भी नहीं हिलता है | और आपके प्रजा जन आपके डर से आपको भगवान् बोलते है |

पिता के लाख समझाने पर भी उसने नहीं माना और भगवान की भक्ति करता रहा | वह सुबह उठते बैठते सोते जागते ॐ नमः भगवते वासुदेवाय: का जाप करते रहते थे |

परेशान होकर राजा ने उसे मारने के लिए बहुत कोशिश की , लेकिन भगवान के शक्ति के आगे उसकी क्या औकात ? हर बार भगवान उसे बचते रहे | उसकी बहन होलिका को भगवान के वरदान से ऐसी चादर मिली थी जिसे ओढ़ने पर अग्नि उसे जला नहीं सकती | उसी चादर को ओढ़कर होलिका ने प्रह्लाद को अपने गॉड में लेकर अग्नि में बैठ गई और चारो और से आग लगा दी गई |

भगवान् के संयोग से एक भयंकर हवा का झोका आया और वो चादर उड़कर प्रह्लाद से लिपट गया | और होलिका जल गई और प्रह्लाद की जान बच गया | इस प्रकार भगवान् ने अपने भक्त की रक्षा की |

Holika Dahan 2020

होलिका दहन 9 मार्च सोमवार के दिन है |

होलिका दहन का महत्व- importance of Holika Dahan

होलिका दहन को हम सभी होली कहते है इसे हम छोटी होली भी कहते है | यह त्यौहार पर बुराई पर अच्छे की जित होती है | नकारात्मक शक्तियां का अंत होती है और धर्म और मेहनत करने वाले की जीत होती है | जब होलिका का दहन होता है तब सभी महिलाए एकत्रित होकर उनकी पूजा करते है | और अनाज को जलती हुई आग में डालकर जलाते है और उसकी राख को घर में ले जाकर रखते है | और फिर उसकी राख को अपने माथे पर भी लगते है की नकारात्मक शक्तिया का बुरा प्रभाव ना पड़े |

लोग होलिका दहन की तैयार पहले से शुरू कर देते है | और सूखे पते तथा पेड़ की डालियाँ तथा टहनियां को एकत्रित करने शुरू कर देते है |

निष्कर्ष :- होलिका दहन से हम सभी को यही सीख लेनी चाहिए की अगर आपके अंदर मजबूत इच्छा शक्ति हो तो कोई भी आपका बाल बांका नहीं कर सकता | और सभी बुराइयों से बचा जा सकता है | जैसे- प्रह्लाद की कहानी |

बुराई कितनी भी ताकतवर क्यों न हो अंत में जीत अच्छाई की ही होती है |

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