चित्रगुप्त पूजा कब और क्यों मनाई जाती है ?

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भाई दूज और चित्रगुप्त पूजा दोनों एक ही दिन यानि दीवाली के दूसरे दिन ही मनाया जाता है लेकिन इस बार थोड़ा हेर फेर हुआ है . लेकिन इस साल चित्रगुप्त पूजा 27 अक्टूबर को मनाई जाएगी . इस लेख में हम जानेंगे की चित्रगुप्त जी कौन है और उनका क्या काम है और हम सभी चित्रगुप्त पूजा क्यों मनाते है .

चित्रगुप्त पूजा कब और क्यों मनाई जाती है ?

 Chitragupta Puja 2022: चित्रगुप्त जी स्वर्ग के देवता है . स्वर्ग में यमराज और चित्रगुप्त जी दोनों सहपाठी है . चित्रगुप्त जी भगवन के लेखाकार है . उनके पास पृथ्वी पर के सभी जीवों का लेखा जोखा होता है . किस मनुष्य या जीव की कितनी आयु शेष है या फिर उन्होंने अपने जीवन कल में क्या पुण्य कमाए और क्या पाप . इन सभी का लेखा जोखा भगवन चित्रगुप्त जी करते है .

चित्रगुप्त पूजा कब और क्यों मनाई जाती है ?

चित्रगुप्त पूजा कब मनाई जाती है ?

हिंदी पंचांग के अनुसार, कार्तिक माह में शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि को चित्रगुप्त भगवन की पूजा की जाती है। इस दिन सभी जीवों के कर्मों का लेखा जोखा रखने वाले और ज्ञान के अधिष्ठाता भगवान चित्रगुप्त जी की पूजा करने का विधान है। साथ ही आज भाई दूज भी मनाया जा रहा है।

दिवाली के अगले दिन सूर्य ग्रहण पड़ने के चलते तिथि में बदलाव हुआ है। धार्मिक मान्यता है कि चित्रगुप्त जी की पूजा अर्चना करने से व्यक्ति को ज्ञान की प्राप्ति होती है। इस दिन कायस्थ समाज के लोग कॉपी कलम को हाथ नहीं लगाते हैं बल्कि उनकी पूजा करते है ।

चित्रगुप्त पूजा 2022 मुहूर्त (Chitragupta Puja 2022 muhurat)

हिंदू पंचांग के अनुसार कार्तिक माह के शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि 26 अक्टूबर 2022 को दोपहर 02 बजकर 42 मिनट पर आरंभ होगी. द्वितीया तिथि का समापन 27 अक्टूबर 2022 को दोपहर 12 बजकर 45 मिनट पर होगा.

चित्रगुप्त पूजा मुहूर्त – दोपहर 01 बजकर 18 – दोपहर 03 बजकर 33 (26 अक्टूबर 2022)

कौन हैं चित्रगुप्त ? (Who is Chitragupta ?)

धर्म ग्रंथों के अनुसार चित्रगुप्त ब्रह्मा जी के मानस पुत्र हैं. कहते हैं किसी भी प्राणी के पृथ्वी पर जन्म से लेकर मृत्यु तक उसके कर्मों को अपने पुस्तक में लिखते रहते हैं, उनकी लेखनी के आधार पर ही व्यक्ति को स्वर्ग और नर्क की प्राप्ति होती है. चित्रगुप्त कायस्थ समाज के ईष्ट देवता माने जाते हैं.

चित्रगुप्त पूजा के महत्व (Importance of Chitragupta Puja)

कलयुग में चित्रगुप्त पूजा का विशेष महत्व है। चित्रगुप्त जी सभी जीवों के कर्मों का लेखा जोखा लिखते हैं। मृत्यु के उपरांत कर्मों के अनुरूप व्यक्ति को स्वर्ग और नर्क में स्थान मिलता है। बुरे कर्म करने वाले लोगों को नर्क की यातनाएं सहनी पड़ती हैं।

चित्रगुप्त जी की पूजा करने से व्यक्ति को ज्ञान की प्राप्ति होती है। साथ ही जीवन में मनोवांछित फल की प्राप्ति होती है। इसके अलावा, चित्रगुप्त जी की कृपा से नर्क की यातनाओं से मुक्ति मिलती है। इसके लिए चित्रगुप्त जी की पूजा विधि विधान से करनी चाहिए। इस दिन स्नान ध्यान से निवृत होकर सबसे पहले आमचन कर संकल्प लें। अब भगवान चित्रगुप्त की पूजा फल, फूल, धूप-दीप, रोली, अक्षत, मिठाई से करें। अंत में अपनी गलतियों के लिए क्षमा याचना कर उनसे सुख-समृद्धि की प्रार्थना   करनी चाहिए .

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