Guru Gobind Singh Biography, Life facts and Life Struggle Hindi

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गुरु गोविन्द सिंह की जीवनी-Guru Gobind Singh Biography

  • Guru Gobind Singh– सिखों के दसवें गुरु श्री गुरु गोबिन्द सिंह का जन्म दिन हर साल 5 जनवरी को मनाया जाता है।
  • उन्होने महज 9 बर्ष की आयु में ही सिखों के दसवें गुरु का पद संभाल लिया था ।
  • गुरु गोबिन्द सिंह [Guru Gobind Singh] एक अध्यात्मिक नेता, महान योध्दा तथा कवि भक्त थे ।
  • इनके जन्म दिन के उप्लक्ष में गुरु द्वारे में एक सप्ताह पहले से ही गुरुवाणी और भजन-संध्या का कार्यक्रम रोज-रोज होता है ।
  • इस दिन सिख समुदाय लोग बहुत खुशी-खुशी से इनका जन्म-दिन मनाते है। चारो ओर चहल-पहल होता है| गुरुद्वारे में विशाल भण्डारा का कार्यक्रम होता है, रथ-यात्रा एवं जुलुस भी निकाले जाते है ।

Guru Gobind Singh Early Life History

बच्चपन का नाम गोबिन्द राय
जन्म तिथि 5 जनवरी 1666
जन्म स्थान पटना, बिहार, भारत
मृत्यु 07 अक्टुवर 1708 (आयु 42 बर्ष)
स्थान नांदेड, महाराष्ट्र, भारत
धर्म सिख
पिता गुरु तेग बहादुर
मां माता गुजरी
पत्नी इनके तीन पत्नियां थी-

 

  • माता जीतो,
  • माता सुंदरी तथा
  • माता साहिब देवन
पुत्र
  • अजीत सिंह
  • जुझार सिंह
  • जोरवर सिंह तथा
  • फ़तेह सिंह
पुत्री कोई नही
प्रसिध खालसा पंथ के संस्थापक
रचना जाप सहिब, चंडी दी वार, जफ़रनामा, बचित्र नाटक, अकाल उस्तत, चौपाईं
उतराधिकारी गुरु ग्रंथ साहिब
नाम सर्वस्वदानी, कलगीधर, दशमेश, बाजांवाले, संत सिपाही

गुरु गोबिंद सिंह [Guru Gobind Singh] का जन्म और प्रारंभिक जीवन Early Life

 

गुरु गोविंद सिंह का जन्म 05 जनवरी 1966 को पटना बिहार में हुआ था । इनके पिता का नाम तेग बहादुर थे, जो सिखों के नौवें गुरु थे, तथा माता का नाम गुजरी था । गुरु गोविन्द सिंह अपने माता-पिता के एकलौते संतान थे । अपने एकलौते पुत्र के जन्म के समय इनके पिता असम आदि राज्यों में धर्म उपदेश के लिए गये थे । इनका बच्चपन का नाम गोबिंद राय था ।

 

पटना का तखत श्री पटना साहिब जहां पर इनका जन्म हुआ था सिखों के दार्शनिक स्थल है। गुरु गोविंद सिंह के जन्म के 4 बर्ष बाद इनका परिवार पंजाब के आनन्दपुर साहिब आ गए।

 

आनन्दपुर साहिब में ही गुरु गोबिंद सिंह ने पंजाबी, फ़ारसी और संस्कृत की शिक्षा ली तथा युध्द-कला के लिए सैन्य कौशल सीखा ।

आनन्द्पुर वाकइ में आनन्द धाम था |  गुरु गोविंद सिंह चक्क नानकी उर्फ़ आनन्दपुर साहिब में सभी स्थानीय लोगों को शांति, धर्म , निडरता और मानवता का पाठ पढाते थे ।  वे स्वयं एक अक्षम्य और शांति के जीति-जागती मुर्ति थे ।

 

गुरु गोबिंद सिंह और औरंगजेब शासन

 

उस समय औरंगजेब का शासन था और जबरन धर्मान्तर किया जा रहा था । जो इस्लाम धर्म स्वीकार नही करता था उसका सर काट दिया जाता था । और 11 नवम्बर 1675 को गुरु तेग बहादुर का भी सर काट दिया गया । गुरु तेग बहादुर ने अपने मृत्यु के पहले ही गुरु गोविन्द सिंह को अपना उतराधिकारी घोषित कर दिया था ।

 

29 मार्च 1676 वैशाखी के दिन ही गुरु गोविन्द सिंह सिखों के दसवें गुरु बन गए। तत्पश्चात उन्होने यमुना नदी के किनारे पाओटा नामक स्थान पर रहकर लिखना-पढना, घुडसवारी, मार्शल-आर्ट तथा धनुष विधा सीखा और 1684 में एक महाकाव्य की रचना की जिसका नाम है –चंडी दी वार  जो पंजाबी भाषा में है इस महाकाव्य में अच्छाई और बुराई की लडाई मे अच्छाई की जीत दिखाया गया है।

 

पारिवारिक जीवन – family and wifes

 

उस समय पंजाब में बाल-विवाह की प्रथा थी। और गुरु गोबिन्द् सिंह के तीन पत्नियां थी ।

अत: 21 जुन 1677 को 10 साल की उम्र में गुरु गोबिन्द सिंह का विवाह आनन्दपुर से 10 कि०मी० की दुरी पर बसंतगढ में माता जीतो के साथ हुआ, जिनसे उनके 3 पुत्र-रत्न हुए, जिनके नाम इस प्रकार है- जुझार सिंह, जोरवार सिंह और फ़तेह सिंह।

4 अप्रैल 1684 को आनन्द्पुर में ही 17 साल की उम्र में गुरु गोबिन्द सिंह ने दुसरी शादी माता सुंदरी से किया और उससे एक पुत्र उतपन्न हुआ, जिसका नाम है- अजीत सिंह ।

 

15 अप्रैल 1700 को 33 साल उम्र में इनहोने तीसरी शादी माता साहिब कौर से किया और इनसे कोई संतान नही हुआ ।

 

How many wives Guru Govind Singh had?

How was Guru Gobind Singh Remember for?

गुरु गोबिन्द सिंह सिखों के दसवें गुरु थे। इन्होने खालसा पंथ की स्थापना की, जो सिखों के इतिहास की महत्वपुर्ण घटना है । इन्होने सिख धर्म के पवित्र नियमों एवं सदगुरु के वचनो को एकत्रित करके सिखों के पवित्र ग्रंथ गुरु ग्रंथ साहिब को पुरा किया। वे एक महान धार्मिक नेता और योध्दा थे ।

 

Guru Gobind Singh facts

 

  • गुरु गोबिन्द सिंह का जन्म पटना के तखत श्री साहिब में ०5 जनवरी 1966 को माता गुजरी और गुरु तेग बहादुर के घर मे सोधी खत्री परिवार में हुआ था । इनका बच्चपन का नाम गोबिन्द राय था ।
  • 2019 में गुरु गोबिन्द सिंह का जन्म दिन मनाया गया, जबकि इनका जन्म दिन 5 जनवरी है ।

  • वह 9 साल की आयु में सिखों के दसवें गुरु बने ।

  • उसमे एक गुरु के सारे गुन मौजुद थे-जैसे-सादगी, पवित्रता, धर्म का रक्षक, बडे-छोटों का सम्मान देना आदि।

  • उसने पंज प्यारे या खालसा पंथ की स्थापना की और कुछ नियम बनाएं: केश, कंघा, कारा, कृपाण, कचेरा आदि और गोबिन्द राय से गुरु गोबिंद सिंह बन गए।

  • वह मानव मात्र में नैतिकता, निडरता और अध्यात्मिका जागृति का संदेश देते थे ।

  • वे संस्कृत, फ़ारसी, पंजाबी, मुगल और ब्रज भाषा के ज्ञाता थे ।

  • उन्होंने सिख धर्म ग्रंथ के साथ एक गुरु ग्रंथ साहिब की रचना की.

  • उसके तीन पत्नियां थी और उससे चार पुत्र रतन उतपन्न हुए ।

गुरु गोबिंद सिंह ने अपने धर्म और देश के एकता और अखंडता के निम्न लडाईंयां लडी:-

  1. भगोनी का युध्द – 1688
  2. नादौन का युध्द- 1691
  3. गुलैर का युध्द – 1696
  4. आनन्दपुर का प्रथम युध्द- 1700
  5. आनन्दपुर का दुसरा युध्द- 1701
  6. निर्मोहगढ का युध्द- 1702
  7. बसोली का युध्द- 1702
  8. सरसा का युध्द- 1704
  9. चमकौर का युध्द- 1704
  10. मुकतसार का युध्द- 1705
मृत्यु- Death of Guru Gobind Singh

युध्द के मैदान में युध्द करते समय अचानक उसके छाती पर गहरा चोट लगने से उसकी मृत्यु 18 अक्टूबर, 1708 को 42 वर्ष की आयु में नान्देड में उनकी मृत्यु हो गयी|

 

कुछ विद्वानों का कहना है कि गुरु गोबिंद सिंह और वजीर खान के बीच सबंध अच्चे नही थे और उसने दो आदमियों को गुरु गोबिंद सिंह को मारने के लिए भेजा था ।

 

और जब वे नांदेड साहिब में दिव्य ज्योति में लीन थे मौका पाते ही घातक हथियार से वार कर दिया ।

 

गुरु गोबिंद सिंह एक आदर्शवादी व्यक्ति थे . उन्होंने सदा प्रेम,एकता और भाईचारे का सन्देश दिया . इन्होने सभी सिख गुरुओ के उपदेश और आचरण को संकलन करके गुरु ग्रन्थ साहिब में संगृहीत करके रखा है . हमे भी उनके अच्छे आचरण और विचार से कुछ सिख लेकर अपने जीवन में उतरना चाहिए .

 

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