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bhasmasur Story in HIndi
Religious Story

Bhasmasur story-भस्मासुर और शिव की कहानी क्या है और उसका अंत कैसे हुआ


भस्मासुर और शिव की कहानी








भस्मासुर(Bhasmasur)और शंकर भगवान की कथा

Bhasmasur: हिन्दु-धर्म के पौराणिक ग्रंथों में किसी न किसी देवताओ और असुरों से सबंधित होती है, चाहे वो शत्रुता तथा मित्रता से हो । असुर या राक्षसों का मुख्य काम होता है, धर्म का नाश करना तथा अधर्म को बढावा देना, यु कहें तो असुरों का काम होता है, बुराई का प्रचार करना ।



और देवताओ को असुरों को मिटाने तथा धर्म को बचाने के लिए उनहे अलग-अलग अवतार लेना पडता है । मैं इस पोस्ट में असुर भस्मासुर (Bhasmasur) और भोलेनाथ की कहानी के बारे वर्णन कर रहा हू।

पौराणिक ग्रंथों के अनुसार पुर्व काल में एक भस्मासुर नाम का असुर था । वह पृथ्वी के उतरी तराई भाग के घनघोर जंगल में रहते थे । वह कंद-मुल, फ़ल-फ़ुल, जंगली जानवरों तथा मनुष्यों का शिकार करके जीवन जीता था । वह अपने असुर जाति में बहुत ही सरदार था ।



और उनकी महात्वाकांक्षा थी कि वह समस्त संसार का सरदार बने । और इसके लिए उसे बहुत शक्ति की आवश्यकता थी। अब उसके मन में ये सवाल उतपन्न हो गया कि शक्ति कैसे प्राप्त किया जाय ।




फ़िर भस्मासुर (bhasmasur) अपने गुरु के शरण में गया और उनसे पुछा कि गुरुदेव मुझे समस्त संसार का राजा बनना है, इसके लिए मुझमे शक्ति कहां से आएगी ।

उनके गुरुवर ने कहा-वत्स अगर तुम्हे बहुत शक्ति चाहिए तो एक ही साधन है वह है तपस्या। देवताओ भी खुद तपस्या के बलपर शक्ति प्राप्त करते है । तुम्हे भगवान भोलेनाथ की कठिन तपस्या करनी होगी और वो भी घने जंगल में जाकर एकाग्रचित से ।

फ़िर भस्मासुर ने ये प्रण किया कि मै कठिन तपस्या करके शक्ति जरुर प्राप्त करुंगा । और वह जंगल में जाकर एक पैर पर खडा होकर भुख-प्यास को त्यागकर भगवान शिव की तपस्या करने लगें।

भस्मासुर (Bhasmasur) का वरदान



उनकी कठिन तपस्या को देखकर भगवान शिव अत्यन्त प्रसन्न हुए । भगवान भोले शंकर तुरन्त खुश हो जाते है। और वे उस स्थान पर प्रकट हुए जहां भस्मासुर तपस्या में लीन था । और बोले वत्स आंखे खोलो और वरदान मांगो ।

फ़िर भस्मासुर ने भगवान शिव को प्रणाम किया और कहां भगवन यदि आप हमपर बहुत प्रसन्न है तो मुझे अमरता का वरदान दिजिये । फ़िर भगवान शंकर ने कहा – वत्स अमरता का वरदान नही दिया जा सकता है, क्योकिं पृथ्वी पर जो पैदा हुआ है उसकी मौत निश्चित है आपने मेरी कठिन तपस्या की है कुछ दुसरा वरदान मांग लो । और यह सृष्ट्रि के विधान के विरुध्द है ।

फ़िर भस्मासुर ने भगवान से कहा तो फ़िर आप मुझे ये वरदान दिजिये कि मैं जिसके सिर पर हाँथ रखुं, वो जलकर भष्म हो जाय । फ़िर भगवान शंकर ने कहा- तथास्तु, ऎसा ही होगा ।

फ़िर असुर तो मुर्ख ही ठहरा । उसने सोचा हमा चेक कर लेते है ये वरदान सही या गलत । पहले हम भगवान शिव के सर पर ही हांथ रखकर देख लेंगें ।फ़िर ज्योही भस्मासुर ने अपना हांथ भगवान शिव के सर पर रखना चाहा भगवान भागने लगे ।

आगे-आगे भगवान शिव और पीछे-पीछे भस्मासुर भागते-भागते भगवान शिव एक गुफ़ा में घुस गए, वहां भगवान विष्णु काअ निवास था । भगवान शिव वहां जाकर बोले-भगवन मेरी रक्षा किजिए । फ़िर विष्णु भगवान ने बोले क्या हुआ प्रभू आप किसी अपने परम भक्त को वरदान देने गए थे, फ़िर क्या हुआ ।

फ़िर भगवान शिव ने भस्मासुर और उनके वरदान की पुरी वृतांत कहकर सुनाया, फ़िर विष्णु भगवान ने स्थिति को समझ लिया । और भस्मासुर गुफ़ा के बाहर उनका इंतजार कर रहा था । फ़िर विष्णु भगवान ने भस्मासुर का अंत करने के लिए एक सुंदर सी स्त्री जिसका नाम मोहिनि था उसका रुप धरकर बाहर आया ।



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अचानक भस्मासुर ने जब सुंदर नारी को देखा तो देखता ही रह गया, परम सुंदरी । फ़िर भस्मासुर मोहिनि से आकर्षित होकर विवाह का प्रस्ताव रख देता है।

भस्मासुर (Bhasmasur) वध कथा

फ़िर मोहिनि ने उसे जवाब दिया कि मैं उसी से विवाह करुंगी जो नृत्य-कला मे निपुण हो, अन्यथा नही । अब भस्मासुर दुविधा मे पड गया, अब क्या करें । नारी परम सुंदरी है, विवाह करना चाहता हुं लेकिन मुझे नृत्य करना नही आता है ।

फ़िर भस्मासुर ने मोहिनि से निवेदन किया कि मुझे नृत्य करना सिखा दें । फ़िर मोहिनि राजी हो गई और कहां ठीक है, लेकिन मेरी एक शर्त है, तो भस्मासुर ने कहा आपकी मुझे सब शर्त मंजुर है । आप बोलो तो मोहिनि ने कहा मैं जैसे-जैसे करने को कहुंगी करोगे तो भस्मासुर राजी हो गया ।

फ़िर दोनो के पैर थिरकने लगे और मोहिनि ने उनहे तरह-तरह के नृत्य कला सिखाने लगी और वो एकाग्र होकर सिखने लगे । फ़िर मोहिनि उसे ऎसा नृत्य सिखाती है, जिसमें सर पर हांथ रखकर नृत्य करना होता है ।

भस्मासुर उस नारी के सुंदरता में इतना पगल हो जाता है कि उसे ये ध्यान नही था कि मुझे भगवान शिव का वरदान प्राप्त है कि मैं अगर किसी के सर पर हांथ रखुंगा तो वो जलकर भष्म हो जाउंगा । और उसने अपने सर पर हांथ रख दिया और खुद जलकर भष्म हो गया । और भस्मासुर का वध हो जाता है।

और  इस प्रकार भगवान विष्णु की सहायता से भगवान शंकर का विकट समस्या का अंत हो गया । और वो गुफ़ा जहां भगवान शिव छिपे थे गुप्तधाम से जाना जाता है ।




कहानी का सार: धन और ज्ञान सुयोग्य व्यक्ति को ही देना चाहिए । भगवान द्वारा मिला वरदान का उपयोग जन कल्याण में करना चाहिए ।

भस्मासुर से बचने के लिए पचमढ़ी बनी महादेव की शरणस्थली

हिन्दु धर्म-ग्र्न्थ शिव पुराण के अनुसार भगवान शंकर भस्मासुर के डर से बचने के लिए विंध्याचल पर्वत श्रेणी के तिलक सिंदूर से पचमढ़ी पहुंचे और सैकड़ों साल गुफाओं में विश्राम किया।

बाद में भगवान विष्णु ने मोहनी रूप धरकर भस्मासुर का अंत किया। पचमढ़ी में जिन जगहों पर वे रुके उनके नाम बड़ा महादेव, जटाशंकर, गुप्त महादेव, चौरागढ़ और नागद्वारी पड़े। यहां महाशिवरात्रि और नागपंचमी पर दो मेले लगते हैं।

ये स्थल हिन्दुओ के धार्मिक स्थल बन गया है। पचमढी में दो तीर्थस्थान है जो दुर्गम पहाडों पर बसा है।चौरागढ १२०० मीटर की उचाई पर है तथा नागद्वारी 25 किमी की खड़ी चढ़ाई चढ़कर भक्तों को जाना होता है । तथा जटा शंकर में हवा में झुलती हुई नजर आती दो विशाल चट्टानों के बीच से होकर गुफा में जमीन से कई फीट नीचे जाना होता है।

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