Shiv Chalisa and aarti in Hindi-हर हर महादेव चालीसा और आरती

Shiv Chalisa and aarti in Hindi-हर हर महादेव चालीसा और आरती

Shiv Chalisa and aarti in Hindi (शिव चालीसा )

Shiv Chalisa : भगवान भोलेनाथ सभी देवों के देव है | इसलिए (therefore) उन्हें देवेश्वर कहते है | संसार की सारी शक्तियां उनमे निहित है |

अगर आप भगवान कैलाशपति के सच्चे भक्त है तो यमराज भी आपके नजदीक नहीं आएंगे | Therefore यमराज को भी आपके प्राण लेने के लिए दस बार सोचना पड़ेगा |

उसके अंदर इतनी शक्तियां है की पूरी पृथ्वी को क्षण भर में उलट पुलट कर सकते है | त्रिदेव जिन्होंने संसार की रचना की है | ब्रह्मा , विष्णु और महेश |

ब्रह्मा जी जन्मदाता कहे जाते है और विष्णु जी पालनकर्ता कहे जाते है तथा महेश अर्थात भगवान् भोले शंकर को संहारकर्ता कहे जाते है |

अगर आप भगवान् शिव के सच्चे उपासक है तो आपको अकालमृत्यु का भय कभी नहीं सताएगा |  Similarly ऐसे व्यक्ति मृत्यु के मुँह से सकुशल बच कर बहार आ सकता है |

शिव चालीसा (Shiv Chalisa) इसका पूरा वर्णन मिलता है | अगर भगवान् कैलशनाथ को खुश करना हो तो शिव-चालीसा और आरती नित प्रीतिदिन पढ़ें |

चालीसा क्या होता है |

चालीसा भगवान के प्रार्थना को सरल और सुगम शब्दों में व्याख्या की होती है | जिसे कोई भी काम पढ़ा लिखा आदमी पहकर आसानी से समझ सकता है | और इसे पढ़ने के लिए कोई नियम नहीं होता है |

क्योकि (because) भगवान की प्रार्थना आप कभी भी और कैसे भी कर सकते है | भगवान् के प्रति आपके अंदर प्रेम होना चाहिए | क्योकि भगवान प्रेम के वश में होते है |

आज शिवरात्रि है | और आज के दिन भगवान भोलेनाथ और माँ पार्वती पवित्र बंधन में बांध चुके है | भगवान शिव और माँ पार्वती के पूजा करने से सारे पाप नष्ट हो जाते है और सभी मनोकामना पूर्ण होती है |

महाशिवरात्रि के दिन व्रत रखकर ॐ नमः शिवाय के साथ भगवान भोलेनाथ की पूजा करें तथा शिव चालीसा पढ़ें और उनकी आरती भी पढ़ें |

Shiv Chalisa in Hindi (शिव चालीसा और आरती )

shiv chalisa is a prayer therefore it is sung for Lord Shiva. Now here writting :-

Shiv Chalisa

शिव चालीसा

दोहा

श्री गणेश गिरिजा सुवन, मंगल मूल सुजान।

कहत अयोध्यादास तुम, देहु अभय वरदान॥

जय गिरिजा पति दीन दयाला। सदा करत संतन प्रतिपाला॥

भाल चंद्रमा सोहत नीके। कानन कुंडल नागफनी के॥

अंग गौर शिर गंग बहाए। मुंडमाल तन छार लगाए॥

वस्त्र खाल बाघम्बर सोहे। छवि को देख नाग मुनि मोहे॥

मैना मातु की ह्वै दुलारी। बाम अंग सोहत छवि न्यारी॥

कर त्रिशूल सोहत छवि भारी। करत सदा शत्रुन क्षयकारी॥

नंदि गणेश सोहै तहँ कैसे। सागर मध्य कमल हैं जैसे॥

कार्तिक श्याम और गणराऊ। या छवि को कहि जात न काऊ॥

देवन जबहीं जाय पुकारा। तब ही दु:ख प्रभु आप निवारा॥

किया उपद्रव तारक भारी। देवन सब मिलि तुमहिं जुहारी॥

तुरत षडानन आप पठायउ। लवनिमेष महँ मारि गिरायउ॥

आप जलंधर असुर संहारा। सुयश तुम्हार विदित संसारा॥

त्रिपुरासुर सन युद्ध मचाई। सबहिं कृपा कर लीन बचाई॥

किया तपहिं भागीरथ भारी। पुरब प्रतिज्ञा तसु पुरारी॥

दानिन महं तुम सम कोउ नाहीं। सेवक स्तुति करत सदाहीं॥

वेद नाम महिमा तव गाई। अकथ अनादि भेद नहिं पाई॥

प्रगट उदधि मंथन में ज्वाला। जरे सुरासुर भये विहाला॥

कीन्ह दया तहँ करी सहाई। नीलकण्ठ तब नाम कहाई॥

पूजन रामचंद्र जब कीन्हा। जीत के लंक विभीषण दीन्हा॥

सहस कमल में हो रहे धारी। कीन्ह परीक्षा तबहिं पुरारी॥

एक कमल प्रभु राखेउ जोई। कमल नयन पूजन चहं सोई॥

कठिन भक्ति देखी प्रभु शंकर। भए प्रसन्न दिए इच्छित वर॥

जय जय जय अनंत अविनाशी। करत कृपा सब के घटवासी॥

दुष्ट सकल नित मोहि सतावै। भ्रमत रहे मोहि चैन न आवै॥

त्राहि त्राहि मैं नाथ पुकारो। यहि अवसर मोहि आन उबारो॥

लै त्रिशूल शत्रुन को मारो। संकट से मोहि आन उबारो॥
मातु पिता भ्राता सब कोई। संकट में पूछत नहिं कोई॥

स्वामी एक है आस तुम्हारी। आय हरहु अब संकट भारी॥

धन निर्धन को देत सदाहीं। जो कोई जांचे वो फल पाहीं॥

भोलेनाथ की आरती

अस्तुति केहि विधि करौं तुम्हारी। क्षमहु नाथ अब चूक हमारी॥

शंकर हो संकट के नाशन। मंगल कारण विघ्न विनाशन॥

योगी यति मुनि ध्यान लगावैं। नारद शारद शीश नवावैं॥

नमो नमो जय नमो शिवाय। सुर ब्रह्मादिक पार न पाय॥

जो यह पाठ करे मन लाई। ता पार होत है शम्भु सहाई॥

ॠनिया जो कोई हो अधिकारी। पाठ करे सो पावन हारी॥

पुत्रहीन कर इच्छा कोई। निश्चय शिव प्रसाद तेहि होई॥

पंडित त्रयोदशी को लावे। ध्यान पूर्वक होम करावे॥

त्रयोदशी व्रत करे हमेशा। तन नहीं ताके रहे कलेशा॥

धूप दीप नैवेद्य चढ़ावे। शंकर सम्मुख पाठ सुनावे॥

जन्म जन्म के पाप नसावे। अन्तवास शिवपुर में पावे॥

कहे अयोध्या आस तुम्हारी। जानि सकल दुःख हरहु हमारी॥

दोहा

नित्त नेम कर प्रातः ही, पाठ करौं चालीसा।

तुम मेरी मनोकामना, पूर्ण करो जगदीश॥

मगसर छठि हेमन्त ॠतु, संवत चौसठ जान।

अस्तुति चालीसा शिवहि, पूर्ण कीन कल्याण॥


ओम जय शिव ओंकारा की आरती

जय शिव ओंकारा, ॐ जय शिव ओंकारा ।

ब्रह्मा, विष्णु, सदाशिव, अर्द्धांगी धारा ॥

॥ जय शिव ओंकारा…॥

एकानन चतुरानन पंचानन राजे ।

हंसासन गरूड़ासन वृषवाहन साजे ॥

॥ जय शिव ओंकारा…॥

दो भुज चार चतुर्भुज दसभुज अति सोहे ।

त्रिगुण रूप निरखते त्रिभुवन जन मोहे ॥

॥ जय शिव ओंकारा…॥

अक्षमाला वनमाला मुण्डमाला धारी ।

चंदन मृगमद सोहै भाले शशिधारी ॥

॥ जय शिव ओंकारा…॥

श्वेतांबर पीतांबर बाघंबर अंगे ।

सनकादिक गरुणादिक भूतादिक संगे ॥

॥ जय शिव ओंकारा…॥

कर के मध्य कमंडल चक्र त्रिशूलधारी ।

सुखकारी दुखहारी जगपालन कारी ॥

॥ जय शिव ओंकारा…॥

ब्रह्मा विष्णु सदाशिव जानत अविवेका ।

प्रणवाक्षर में शोभित ये तीनों एका ॥

॥ जय शिव ओंकारा…॥

त्रिगुणस्वामी जी की आरति जो कोइ नर गावे ।

कहत शिवानंद स्वामी सुख संपति पावे ॥

॥ जय शिव ओंकारा…॥

लक्ष्मी व सावित्री पार्वती संगा ।

पार्वती अर्द्धांगी, शिवलहरी गंगा ॥

॥ जय शिव ओंकारा…॥

पर्वत सोहैं पार्वती, शंकर कैलासा ।

भांग धतूर का भोजन, भस्मी में वासा ॥

॥ जय शिव ओंकारा…॥

जटा में गंग बहत है, गल मुण्डन माला ।

शेष नाग लिपटावत, ओढ़त मृगछाला ॥

॥ जय शिव ओंकारा…॥

काशी में विराजे विश्वनाथ, नंदी ब्रह्मचारी ।

नित उठ दर्शन पावत, महिमा अति भारी ॥

जय शिव ओंकारा, ॐ जय शिव ओंकारा ।

ब्रह्मा, विष्णु, सदाशिव, अर्द्धांगी धारा ॥

Shiv Chalisa:- भगवान भोलेनाथ की उपासना करने से घर में सुख-शांति का वातावरण मिलता है | सारी मनोकामनाए पूर्ण होती है | मृत्यु का भय नहीं सताता है | इसलिए (therefore) सदैव इनकी पूजा करें |

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