We are social

बाबा हरभजन सिंह की कहानी (Baba Harbhajan Singh Story)




Baba Harbhajan Singh Biography in Hindi: हमारे देश के सैनिक इतने वफ़ादार होते है, कि चिलचिलाती धुप हो या हड्डी को पिघला देने वाली भयानक सर्दी फ़िर भी सीमा पर अपने देश के दुश्मनों को घुटने टेकने पर मजबुर कर देते है । वे इतने देशभक्त होते है कि भारत-माता की रक्षा के लिए अपने सब कुछ कुर्बान कर देते है ।

एक ऎसे ही सैनिक की मैं बात करने जा रहा हुं जो जबतक जीवित रहा तबतक देश की तो सेवा की, लेकिन मरणोंपरांत भी अपना कर्तव्य निभा रहे है । आप सोंच रहे होंगे कि भला कोई मरणोंपरांत कैसे देश की सेवा कर सकता है, मरने के बाद तो आदमी भुत हो जाता है। और भुत का कोई असतित्व नही होता ।

लेकिन शहीद बाबा हरभजन सिंह (Baba Harbhajan Singh) जिनकी मौत आज से करीब 50 बर्ष पहले हो चुका है, लेकिन आज भी वो सीमा पर तैनात है, और अपना कर्तव्य निभा रहे है ।
हरभजन सिंह जो इंडियन आर्मी में सैनिक थे, जिनका मौत 1967 में हो गया, लेकिन आज भी वो देश की रक्षा करते है, रात्रि में गश्त करते है और अपने साथी सैनिकों की जान बचाते है । भारत सरकार उनहे वकायदा उनहे तनख्वाह देती है, उनका प्रमोशन होता है, इसके अलावा उनहे पद की सारी सुविधा मुहैया कराई जाती है । उनहे आर्मी के जवान और सभी उनको नाथुला के हीरो कहते है ।










बाबा हरभजन सिंह (Baba Harbhajan Singh) की जीवनी




पुरा नाम                 हरभजन सिंह

जन्म                       30 अगस्त 1946

स्थान                      सादराना गांव जिला- गुजरावाला

उनके माता-पिता     अमर कौर

बाबा हरभजन सिंह का जन्म सिख परिवार में 30 अगस्त 1946 पंजाब के सदराना गांव, जिला गुजरावाला मे हुआ था । उसने अपनी प्रारंभिक शिक्षा अपने गांव के स्कुल से की । और उसने मार्च 1965 में पट्टी, पंजाब के डीएवी हाई स्कूल से मैट्रिकुलेशन की पढाई पुरा किया।

तत्पश्चात वे अमृतसर में उन्होने ईंडियन आर्मी ज्वाइन कर लिया और पंजाब रेजिमेंट में शामिल हो गए।

wp:paragraph –>

लेकिन उनकी देशभक्ति और लगन को देखकर
उनहे 14 राजपुत रेजीमेंट में ट्रांसफ़र कर दिया । पुन: उसे 14 राजपुत रेजीमेंट से उसे
18  राजपुत रेजीमेंट में ट्रांसफ़र कर दिया ।

उसी समय पाकिस्तान ने भारत पर आक्रमण कर दिया थ। तब हरभजन सिंह भारत-पाक युध्द में शामिल हुए थे । और 11 सितम्बर 1967 को सिक्किम में उनकी मौत हो गई। एक कथा के अनुसार उनका मौत भारत-पाक युध्द के दरम्यान हुई थी। और उनहे महावीर चक्र से सम्मानित भी किया गया था । एक दुसरी कथा के अनुसार सिक्किम और तिब्बत के बीच भारत-चीन सीमा की रखवाली के दौरान वे गधे पर आर्मी का सामान लादकर एक स्थान से दुसरे स्थान ले जा रहे थे और वो रास्ता इतना दुर्गम था कि वो ग्लेशियर धस गया और वे काफ़ी नीचे तेज गती से बहते हुए झरने मे गिर गए।  और बह के आगे बढ गए । फ़िर वे अचानक गायक हो गए । उनहे काफ़ी खोजा गया, लेकिन कहीं नही मिला । 

फ़िर उनहोने अपने एक साथी के सपने में आकर वो स्थान बताया जहां उसकी पार्थिव शरीर पडी थी । सवेरे जन सभी सैनिक उनके बताई गई स्थान पर जाकर (बंकर) ढुंढा तो सचमुच वही पर उसका पार्थिव शरीर पडी थी ।

बाबा हरभजन सिंह मंदिर सिक्किम

फ़िर उनहोने अपने एक साथी के सपने में
आकर वो स्थान बताया जहां उसकी पार्थिव शरीर पडी थी । सवेरे जन सभी सैनिक उनके बताई
गई स्थान पर जाकर (बंकर) ढुंढा तो सचमुच वही पर उसका पार्थिव शरीर पडी थी ।

फ़िर उनके पार्थिव शरीर को राजकीय सम्मान
के साथ दाह-संस्कार किया गया । लेकिन उसके इस तरह सपने मे आने से उसके साथी चमत्कार
मानने लगे । बाबा ने सपने में आकर कहा कि मेरे नाम की एक मन्दिर बना दो और लोगों का
उसके प्रति आस्था बढ गई,और इस तरह वह स्थान को एक मन्दिर का रुप दे दिया गया । फ़िर
बढती लोकप्रियता को देखते हुए प्रशासन ने एक मन्दिर का निर्माण करवा दिया ।




यह मन्दिर बाबा हरभजन सिंह मन्दिर के नाम से मशहुर हो गया । उनका यह मंदिर ‘जेलेप्‍ला दर्रे और नाथू ला दर्रे’ के बीच में 13000 फीट की ऊंचाई पर स्थित है।  पुराना बंकर वाला जहां पर बाबा का पार्थिव शरीर मिला था , इस मंदिर इस से 1000 फीट ज्यादा ऊंचाई पर स्थित है। मंदिर के अंदर बाबा हरभजन सिंह (Baba Harbhajan Singh) की एक फोटो और उनका कुछ सामान वगैरह रखा है।

ड्यूटी के पक्के थे बाबा

सैनिकों का कहना है कि अगर चीन की
तरफ़ से कोई सुगबुगाहट होती थी, तो बाबा की आत्मा हमें पहले ही खतरे की आगह कर देते
थे । और यदि भारतीय सैनिकों को चीन के सैनिकों की कोई भी मोमेंट पसंद नहीं आती तो उसके
बारे में वह चीन के सैनिकों को पहले ही बता देते हैं। ताकि बात ज्यादा ना बिगड़े और
मिल-जुलकर बातचीत से उसका हल निकाला जा सके।

 

चीन के सैनिकों का भी ऎसा ही मानना
है कि हरभजन सिंह रात को घोडे पर सवार होकर गश्त पर निकलता है । बाबा हरभजन सिंह का
रैंक सैनिक से कैप्टन हो गया था । भारत और चीन के बीच कोई भी अफ़सर ग्रेड की बैठक होती
है तो उस बैठक में बाबा हरभजन सिंह के नाम की एक कुर्सी खाली रखी जाती है ।

ड्युटी पर तैनात सैनिकों का ऎसा कहना
है कि बाबा हरभजन सिंह अपने ड्युटी के पक्के है । कहते है कि बाबा अपने मृत्य के पश्चात
लगातर ड्युटी दे रहे है। क्योकिं उसके कमरे मे मंदिर में बाबा का एक कमरा भी है जिसमे
प्रतिदिन सफाई करके बिस्तर लगाए जाते है। बाबा की सेना की वर्दी और जुते  रखे जाते है। कहते है की रोज़ पुनः सफाई करने पर
उनके जूतों में कीचड़ और चद्दर पर सलवटे पाई जाती है।

ऎसा मानना है कि साल के दो महीने बाबा
को छुट्टी मिलती है । और उनके पंजाब उनके पैतृक गांव ट्रेन से भेजा जाता है, उसके लिए
ट्रेन  मे टिकट रिजर्वेशन किया जाता है, आर्मी
की गाडी उसे रेलवे स्टेशन लेकर जाती है फ़िर वहां से ट्रेन से कपुरथला अपने गांव पहुचता
है, दो सैनिक उसके सामन लेकर उसके गांव जाकर उसके परिजनों को सौपते है, फ़िर छुट्टी
समाप्त होते ही उन्हे पुन: लेकर आते है ।

कुछ लोग इसे अंधविश्वास समझने लगे और सेना मे अंधविश्वास नाम की चीज नही होना चाहिए तबसे उनकी छूट्टी समाप्त कर दी गई और वे बारह महीने छुट्ट् पर ही रहते है ।

आस्था का केन्द्र है बाबा हरभजन सिंह का मन्दिर

यहां आने वाले हर कोई बाबा हरभजन सिंह
के मन्दिर में माथा टेकते है । एक दुसरी मान्यता यह है कि इस मन्दिर से जल भरकर तीन
दिन तक अगर रख दिया जाय तो उस जल मेम औषधीय गुण आ जाता है और उस जल को पीने से कोई
भी असाध्य बीमार का असर समाप्त हो जाता है, सारे रोग मिट जाते है |



बाबा हरभजन सिंह मरकर भी आज भी पक्का देशभक्त है। तो दोस्तो अगर आपके पास इससे अच्छा कोई जानकरी हो तो मुझे कमेण्ट करके जरुर बताना ।

Read Related Post:

  • भस्मासुर और भगवान शिव की कहानी
  • महापुरुषों के समाधि-स्थल




 

https://www.pxxstory.com/wp-content/uploads/2019/01/Baba-Harbhajan-singh-biography-hindi.pnghttps://www.pxxstory.com/wp-content/uploads/2019/01/Baba-Harbhajan-singh-biography-hindi.pngindradev yadavBiographyBaba Harbhajan Singh,Baba Harbhajan Singh Biography,Ghost,Ghost Storyबाबा हरभजन सिंह की कहानी (Baba Harbhajan Singh Story) (adsbygoogle = window.adsbygoogle || ).push({}); पुरा नाम                 हरभजन सिंह जन्म                       30 अगस्त 1946 स्थान                      सादराना गांव जिला- गुजरावाला उनके माता-पिता     अमर कौर बाबा हरभजन सिंह का जन्म सिख परिवार में 30 अगस्त 1946 पंजाब के सदराना गांव, जिला गुजरावाला मे हुआ था । उसने अपनी प्रारंभिक...Blogging, WordPress, SEO and Make Money Celebration
We are social