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आम का पेड़ की कहानी-Motivational Story

आम का पेड़ की कहानी

 

आम का पेड़: एक समय की बात है किसी राजा के राज्य में एक फलों का बगीचा था, उस बगीचें में एक आम का बहुत बड़ा सा पेड़ था। उस बगीचें में उस मोहल्ले के बहुत बच्चे खेलने जाते थे और सभी खेलकर वापस अपने घर चले जाते थे | उस बच्चों में एक छोटा बच्चा था , जो रोजाना उस पेड़ के पास आता था और उस पेड़ के साथ खेलता था और उसे उस आम के पेड़ के साथ खेलना अच्छा लगता था। वह बच्चा उस आम के पेड़ के साथ अपने दोस्तों जैसा व्यवहार करता था |

वह पेड़ में चढ़ता था, उसके फल खाता था और उसकी छाँव में लेटता भी था। इस तरह वो बच्चा पेड़ से बहुत प्यार करता था और वो पेड़ भी उस बच्चे से मन ही मन बहुत प्यार करता था | पेड़ उस बच्चे को वो सभी प्यार देता था जो उसके वो हक़दार था |

धीरे-धीरे समय का पहिया चलता रहा और समय गुजरता रहा और वो बच्चा भी धीरे-धीरे बड़ा होने लगा और उसके सर पर जिम्मेदारियां बढ़ने लगी , तो वो बच्चा अब उस आम के पेड़ के पास खेलने भी नही जाता था। मतलब वो अब बगीचें में जाना बिलकुल बंद भी कर दिया |

वो आम का पेड़ रोज देखता की मोहल्ले के सारे बच्चे खेलने आते है, लेकिन वो एक बच्चा क्यों नहीं आता है | बहुत इंतजार करने के बाद एक दिन वो बच्चा दिखा |
एक लम्बे इंतजार करने के बाद एक दिन वो बच्चा आया, फिर इधर उधर घूमने के बाद काफी समय के बाद वह बच्चा उस पेड़ के पास आया | वो मन से काफी दुखी लग रहा था।

आम के पेड़ ने उसे देखा और बोला “आओ खेलो मेरे साथ” यह सुनकर उस लड़के ने जवाब दिया “अब मै बच्चा नही रहा और मैं अब बड़ा हो गया हूँ और पेडों के साथ नही खेलता, अब मुझे खेलने के लिए खिलौने चाहिए और मुझे खिलौने खरीदने के लिए पैसे चाहिए “|

आम का पेड़ की कहानी

पेड़ ने सब चुपचाप सुनता रहा , फिर पेड़ ने कहा “माफ़ करना मेरा पास पैसे तो नही है लेकिन तुम मेरे टहनी में लगे सारे आम तोड़ के ले जाओ और उसे बेच दो फिर तुम्हारे पास पैसे आ जाएंगे” | अब उस बच्चे के मानसपटल पर मुस्कान की कुछ बुँदे दिखी |

वह लड़का बहुत उत्साहित हो गया और उसने पेड़ से सारे आम तोड़े और खुसी खुसी लेकर चला गया। और उस आम को ले जाकर बाजार में बेच दिया, जिससे उसके पास कुछ पैसे आ गए |

उसके बाद फिर से वह लड़का काफी लंबे समय तक उस पेड़ के पास नही आया, और जब आया तब वो काफी बड़ा हो चूका था , यानि बच्चा से एक लड़का बन गया था |
पेड़ उसे देखते ही खुश होकर बोला “आओ खेलो मेरे साथ” तब उस आदमी ने बोला “मेरे पास खेलने का समय नही है , मुझे अपने परिवार के लिए काम करना है उनके रहने के लिए मकान बनवानी है क्या तुम मेरी मदद कर सकते हो ?
” पेड़ ने कहा “मेरे पास घर तो नही है जो मै तुम्हे दे सकु लेकिन तुम मेरी शाखाएं काट कर उनको अपना घर बनाने के लिए उपयोग में ला सकते हो” इसलिए उस आदमी ने उस पेड़ की सारी शाखाएँ काट ली और खुसी पूर्वक वँहा से लेकर चला गया |

पहले की तरह फिर से वह लड़का बहुत लंबे समय तक उस पेड़ के पास नही आया। उसके इस व्यवहार से पेड़ अकेला हो गया था और दुखी रहने लगा ।

गर्मी का मौसम था, एक दिन बहुत गर्मी पद रही थी वो लड़का फिर से आकर उस आम के पेड़ के पास पंहुचा | हर बार की तरह इस बार भी पेड़ उसे देख कर बहुत खुस हो गया और कहने लगा “आओ खेलो मेरे साथ” तब उस आदमी ने बोला “मै बहुत दुखी हु और बूढा हो रहा हु इसलिए मै एक बार नौकायान के लिए जाना चाहता हू क्या तुम मुझे नाव दिला सकते हो?
” पेड़ बोला “मेरी Trunk (तना) से तुम नाव बना सकते हो और नौकायान के लिए जा सकते हो” इसलिए उस आदमी ने नाव बनाने के लिए पेड़ के Trunk काट दिए और नौकायान के लिए चला गया और फिर लंबे समय तक वापिस नही आया।
काफी वर्षो बाद वो व्यक्ति फिर से उस पेड़ के पास आया तब पेड़ बोला “माफ़ करना मेरे बच्चे लेकिन मेरे पास अब तुम्हे देने को कुछ भी नही है, आम भी नही, Trunk(तना) भी नही, शाखाएं भी नही, अब मेरे पास बस मेरी सूखी जड़ें बची है” यह सुनकर वह आदमी बोला “अब मुझे ज्यादा कुछ नहीं चाहिये, बस आराम करने के लिए एक शांत जगह चाहिये, मै बहुत थक चूका हु|
” पेड़ बोला “आओ बुढा पेड़ आराम करने के लिए सबसे अच्छी जगह है, आओ और मेरे साथ आराम करो” वो आदमी आराम करने के लिए उस पेड़ के निचे बैठ गया और आज वो बुढा आम का पेड़ उस आदमी को अपने पास पाकर बहुत खुस था।

शिक्षा – इस कहानी से हमें यहि शिक्षा मिलती है की आम का पेड़ हमारे माता-पिता का प्रतीक है। जब हम छोटे होते है हमे उनके साथ खेलना बहुत अच्छा लगता है। जब हम बड़े होने लगते है हम उन्हें छोड़ देते है और केवल तभी उनके पास जाते है जब हमे उनकी जरूरत होती है। माता-पिता हमारे लिए अपने जीवन तक का बलिदान कर देते है, उनके बलिदानों को कभी मत भूलना। इससे पहले की बहुत देर हो जाये उनको प्यार करो उनकी देखभाल करो । माता-पिता से बढ़कर हमारे लिए कुछ नहीं है | हम कितने भी बड़े हो जाये माता-पिता से कभी बड़ा नहीं हो सकते |

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