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History

हर्यक वंश के शासक-का राज्य विस्तार एवं उनके उतरधिकारी

हर्यक वंश( Haryanka Dynasty) का ईतिहास




 

 

हर्यक वंश : मगध साम्राज्य की उत्पति छठी से चौथी शताब्दी ई.पुर्व में हुई। उस समय देश कई छोटे-छोटे 16 राजवंशों में बटां था | उनमे से मगध सबसे शक्तिशाली साम्राज्य बन कर उभरा ।

मगध राज्य की राजधानी राजगीर थी। इतिहासकार का ऎसा मानना है कि जरासंघ और बृहद्रथ इनके संस्थापक थे । लेकिन मगध राज्य का विकास की शुरुआत “हर्यक वंश ” से शुरु हुई, बाद में शिशुनाग और नंद वंश तथा मौर्य वंश का आविर्भाव हुआ ।

मौर्य वंश के शासन काल में मगध राज्य का सम्पुर्ण विकास हुआ ।

 

हर्यक वंश का इतिहास और उसके उतराधिकारी:

मगध साम्राज्य के प्रथम शासक बृहद्रथ वंश के थे। लेकिन उसके पतन के बाद हर्यक वंश का उदय हुआ जो ५४४ ई.पुर्व से ४९२ ई.पुर्व माना जाता है और इसके संस्थापक बिम्बिसार थे, जिन्होने मगध साम्राज्य की नींव रखी ।

इनकी राजधानी राजगीर थी, जिसे बाद मे पाटलीपुत्र कर दिया गया, जिसे आज हम पटना कॆ नाम से जानते है ।




 

हर्यक वंश एक परिचय

 

राज्य का नाम                  मगध

राजधानी                         राजगीर ( बाद में पाटलीपुत्र)

भाषा                              मगही या संस्कृत

स्थापना बर्ष                     छठी शताब्दी के मध्य

पतन का बर्ष                    413 ई.पुर्व

बिम्बिसार                        544 ई.पुर्व से 492 ई.पुर्व

अजातशत्रु                       492 ई.पुर्व से 460 ई.पुर्व

उदयन                            460 ई.पुर्व से 444 ई.पुर्व

मंडक

नागदशक                       437 ई.पुर्व से 413 ई.पुर्व

राजनीतिक परिदृष्य

बिम्बिसार: बिम्बिसार एक कुशल शासक था। वह एक दुरदर्शी तथा महात्वाकांक्षी था। उसने  वैवाहिक निति को अपनाकर अपने राज्य के विस्तार की ।

उसने लिच्छवि गणराज्य के शासक चेतक की पुत्री चेल्लना के साथ विवाह किया। दूसरा वैवाहिक सम्बन्ध कौशल राजा प्रसेनजीत की

बहन महाकौशला के साथ विवाह किया। इसके बाद भद्र देश की राजकुमारी क्षेमा के साथ विवाह किया।

 

महावग्ग के अनुसार बिम्बिसार की ५०० रानियाँ थीं। उसने अवंति के शक्‍तिशाली राजा चन्द्र प्रद्योत के साथ दोस्ताना सम्बन्ध बनाया। सिन्ध के शासक रूद्रायन तथा गांधार के मुक्‍कु रगति से भी उसका दोस्ताना सम्बन्ध था।

 

 

उसने अंग राज्य को जीतकर अपने साम्राज्य में मिला लिया था वहाँ अपने पुत्र अजातशत्रु को उपराजा नियुक्‍त. किया था। बिम्बिसार महात्मा बुद्धका मित्र और संरक्षक था। विनयपिटक के अनुसार बुद्ध से मिलने के बाद उसने बौद्ध धर्म को ग्रहण किया|

 

लेकिन जैन और ब्राह्मण धर्म के प्रति उसकी सहिष्णुता थी। बिम्बिसार ने करीब ५२ वर्षों तक शासन किया। बौद्ध और जैन ग्रन्थानुसार उसके पुत्र अजातशत्रु ने उसे बन्दी बनाकर कारागार में डाल दिया था जहाँ उसका ४९२ ई. पू. में निधन हो गया।

 

बिम्बिसार (श्रेणिक) के बारे में कुछ तथ्य:

  • इनके के पिता का नाम भाटिया या भट्टी था
  • आम्रपाली जो वैशाली की नर्तकी थी, वह परम सुन्दरी थी । उसके सौन्दर्य पर मोहित होकर बिम्बिसार ने लिच्छवि से जीतकर राजगृह में ले आया। और उससे जीवक नामक पुत्ररत्‍न. हुआ। जिसे तक्षशिला में शिक्षा हेतु भेजा गया जो बाद में एक प्रख्यात चिकित्सक एवं राजवैद्य बना। जिसे भगवान बुध्द की सेवा मे भेजा ।
  • बिम्बिसार ने अपने बड़े पुत्र “दर्शक” को उत्तराधिकारी घोषित किया था।
  • बौद्ध भिक्षुओं को निःशुल्क जल यात्रा की अनुमति दी थी।
  • भारतीय इतिहास में बिम्बिसार प्रथम शासक था जिसने स्थायी सेना रखी।
  • बिम्बिसार की हत्या महात्मा बुद्ध के विरोधी देवव्रत के उकसाने पर अजातशत्रु ने की थी।

उनके पुत्र एवं उतराधिकारी

 

अजातशत्रु ( कुणिक): इसे पित्रहन्ता भी कहा जाता है। ये चेल्लना और बिम्बिसार का पुत्र था । अजातशत्रु अपने पिता के तरह ही अपने राज्य का बहुत विकास किया । अजातशत्रु  बौध्द धर्म और जैन धर्म के अनुयायी थे । उसने लगभग ३२ वर्षों तक शासन किया और 460 ई. पू. में अपने पुत्र उदयन द्वारा मारा गया था।

उदयन: ये रानी पद्‍मावती का पुत्र था। इसने गंगा और सोन के संगम पर  पाटलिपुत्र को बसाया तथा अपनी राजधानी राजगृह से पाटलिपुत्र स्थापित की। मगध के प्रतिद्वन्दी राज्य अवन्ति के गुप्तचर ने उदयन की हत्या कर दी ।

 

नागदशक एंव शिशुनाग

बौद्ध धर्म के परम्परा के अनुसार उदयन के तीन पुत्र अनिरुद्ध, मंडक और नागदशक थे। अन्तिम राजा नागदशक था। जो अत्यन्त विलासी और निर्बल था। शासनतन्त्र में शिथिलता के कारण व्यापक असन्तोष जनता में फैला। राज्य विद्रोह कर उनका सेनापति शिशुनाग राजा बना। इस प्रकार हर्यक वंश का अन्त और शिशुनाग वंश की स्थापना 412 ई.पू. में हुई।

 

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