Short essay on world water day in Hindi-विश्व जल दिवस पर निबंध

विश्व जल दिवस पर निबंध- Essay on World Water Day 2021

 जीवन में जल बहुत महत्वपूर्ण है . जल के बिना मनुष्य का अस्तितवा शुन्य है . क्योकि सुबह से लेकर शाम तक हमें जल की ही जरुरत पड़ती है . जल के बिना हम कुछ नहीं कर सकते है . जल हमारे जीवन की आधारभूत इकाई है . 

जल का हमारे दैनिक जीवन में बहुत योगदान है . जिंदगी जीने के लिए साफ और स्वच्छ जल की जरुरत होती है .और प्राकृतिक भंडार में जल का स्रोत सिमित है . इसलिए हम सभी को मिलकर जल भण्डारण क्षमता को सिमित करना है बचाना है . इसी बात को लेकर मैंने ये पोस्ट लिख रहा हूँ की किस प्रकार से आप जल का सरंक्षण कर सकते है . इस पोस्ट में हम बात करेंगे की विश्व जल दिवस क्या है और और विश्व समुदाय में इसका क्या महत्व है .

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world water day in Hindi

विश्व जल दिवस एक अंतराष्ट्रीय त्यौहार है . और इस दिवस को हरेक बर्ष 22 मार्च को मनाया जाता है . इसे मनाने का मुख्य उद्देश्य यह है की विश्व के प्रत्येक देशों में साफ और स्वच्छ जल की उपलब्धता सुनिश्चित करना है . और आम जनता को जल के महत्व से जागरूक भी करवाना है . और सभी लोगों को इस महत्व पर ध्यान को केंद्रित करना है .

विश्व जल दिवस के बारे में जानकारी

हमारे देश भारत में सभी स्कुल-कालेजों में विश्व जल दिवस पर निबंध तथा वाद-विवाद प्रतियोगिता का आयोजन किया जाता है . पानी की आवश्यकता हमें हर घंटे पड़ती है चाहे खाना पकाना हो या फसल को सींचना तथा पक्षियों को पिलाना  .  प्राकृतिक को जीवित रखने के लिए पानी या जल की बहुत आवश्यकता होती है .

Short essay on world water day in Hindi-विश्व जल दिवस पर निबंध

इसी बात को लेकर संयुक्त राष्ट्र ने बर्ष 1939 में एक सामान्य सभा का आयोजन करके इस दिन को एक बार्षिक आयोजन के रूप में मनाने का निर्णय लिया गया . इस अभियान में जल के महत्व को समझाया गया और ये निर्णय लिया गया की हर साल 22 मार्च को इसे एक जागरूक दिवस के रूप में हम मनाएंगे .

 

  

विश्व जल दिवस का इतिहास – History of Water World Day

अभी तक आपने जल के महत्व को अच्छी तरह से समझ ही चुके होंगे . ये हमारे जीवन की जरुरत है . इसे सर्वप्रथम ब्राजील के रियो डी जेनेरियो में साल 1992 में पर्यावरण और विकास के लिए  संयुक्त राष्ट्र सम्मेलन के कार्यक्रम में विश्व जल दिवस मनाने की निर्णय ली गई। और साल 1993 में संयुक्त राष्ट्र ने अपने सामान्य सभा के द्वारा निर्णय लेकर इस दिन को वार्षिक कार्यक्रम के रूप में मनाने का अंतिम रूप दे दिया .

 

लोगों के बीच जल का महत्व, आवश्यकता और संरक्षण के बारे में जागरुकता बढ़ाने के लिये हर वर्ष 22 मार्च को विश्व जल दिवस के रुप में मनाने के लिये यह घोषणा की गयी . “पर्यावरण और विकास पर संयुक्त राष्ट्र सम्मेलन” की अनुसूची 21 में आधिकारिक रुप से जोड़ा गया था और पूरे दिन के लिये अपने नल के गलत उपयोग को रोकने के द्वारा जल संरक्षण में उनकी सहायता प्राप्त करने के साथ ही प्रोत्साहित करने के लिये वर्ष 1993 से इस उत्सव को मनाना शुरु किया। पूरा विश्व-समुदाय जल संरक्षण के मुद्दे पर एकजुट है, क्योंकि जल ही जीवन है और यह जीवन जीने के लिए बुनियादी आवश्यकता है।

 

पहली बार विश्व जल दिवस कब मनाया गया था

विश्व जल दिवस 22 मार्च को मनाया जाता है. सर्वप्रथम ब्राजील के रियो डी जेनेरियो में वर्ष 1992 में पर्यावरण तथा विकास सम्मलेन में संयुक्त राष्ट्र सम्मेलन द्वारा आयोजित कार्यक्रम में विश्व जल दिवस मनाने की घोषणा की गई तथा वर्ष 1993 में संयुक्त राष्ट्र ने अपने सामान्य सभा के द्वारा निर्णय लेकर इस दिन को वार्षिक कार्यक्रम के रूप में मनाने का निर्णय लिया .

 

विश्व जल दिवस 2021

विश्व जल दिवस समस्त विश्व में 22 मार्च दिन सोमवार को मनाया जाएगा .

 

विश्व जल दिवस 2021 की थीम – Theme of World Water Day 2021 

प्रत्येक साल संयुक्त राष्ट्र एक थीम का चयन करता है यह उस साल के पर्यावरण और स्थिति पर निर्भर करता है . जिसे उस बर्ष का थीम कहा जाता है . थीम पर ही उस बर्ष का पूरा फोकस होता है . तो आइए जानते है किस बर्ष क्या थीम राखी गई थी .

  • 1993 के विश्व जल दिवस उत्सव का थीम थी “शहर के लिये जल”।
  • 1994 के विश्व जल दिवस उत्सव का थीम थी “हमारे जल संसाधनों का ध्यान रखना हर एक का कार्य है”।
  • 1995 के विश्व जल दिवस उत्सव का थीम थी “महिला और जल”।
  • 1996 के विश्व जल दिवस उत्सव का थीम थी “प्यासे शहर के लिये पानी”।
  • 1997 के विश्व जल दिवस उत्सव का थीम थी “विश्व का जल: क्या पर्याप्त है”।
  • 1998 के विश्व जल दिवस उत्सव का थीम थी “भूमी जल- अदृश्य संसाधन”।
  • 1999 के विश्व जल दिवस उत्सव का थीम थी “हर कोई प्रवाह की ओर जी रहा है”।
  • 2000 में विश्व जल दिवस उत्सव की थीम थी “21वीं सदी के लिये पानी की आवश्यकता”।
  • 2001 में विश्व जल दिवस उत्सव की थीम थी “जल, स्वास्थ के लिये”।
  • 2002 में विश्व जल दिवस उत्सव की थीम थी “जल, विकास के लिये”।
  • 2003 के विश्व जल दिवस उत्सव की थीम थी “जल, भविष्य के लिये”।
  • 2004 के विश्व जल दिवस उत्सव की थीम थी “आपदा और जल”।
  • 2005 के विश्व जल दिवस उत्सव की थीम थी “2005 से 2015 जीवन के लिये पानी”।
  • 2006 के विश्व जल दिवस उत्सव की थीम थी “जल और संस्कृति”।
  • 2007 के विश्व जल दिवस उत्सव की थीम थी “जल दुर्लभता के साथ मुंडेर”
  • 2008 के विश्व जल दिवस उत्सव की थीम थी “स्वच्छता और सफाई”।
  • 2009 के विश्व जल दिवस उत्सव की थीम थी “जल के पार”।
  • 2010 के विश्व जल दिवस उत्सव की थीम थी “स्वस्थ विश्व के लिये स्वच्छ जल”।
  • 2011 के विश्व जल दिवस उत्सव की थीम थी “शहर के लिये जल”।
  • 2012 के विश्व जल दिवस उत्सव की थीम थी “जल और खाद्य सुरक्षा”।
  • 2013 के विश्व जल दिवस उत्सव की थीम थी “जल सहयोग”।
  • 2014 के विश्व जल दिवस उत्सव की थीम थी “जल और ऊर्जा”।
  • 2015 के विश्व जल दिवस उत्सव की थीम थी “जल और दीर्घकालिक विकास”।
  • 2016 के विश्व जल दिवस उत्सव की थीम थी “जल और नौकरियाँ”
  • 2017 के विश्व जल दिवस उत्सव की थीम थी “अपशिष्ट जल” होगा।
  • 2018 के विश्व जल दिवस उत्सव की थीम थी “जल के लिए प्रकृति के आधार पर समाधान”
  • 2019 के विश्व जल दिवस उत्सव की थीम थी “कोई भी पीछे छोड़”
  • 2020 के विश्व जल दिवस उत्सव की थीम थी “जल और जलवायु परिवर्तन”.
  • 2021 के विश्व जल दिवस उत्सव की थीम है “पानी को महत्व देना (Valuing Water)” है।
विश्व जल दिवस का महत्त्व-Importance of World Water Day

जल का हमारे जीवन में बहुत ही महत्व है . अगर जल का अस्तित्व समाप्त हो जाएगा तो लोगों को जीना मुश्किल हो जाएगा , क्योकि हमारी शरीर की समस्त क्रियाये जल हो तभी हो पति है. भोजन पकाने के लिए जल चाहिए , पशु -पक्षियों को पीने को जल चाहिए , फसल को सिचाई के लिए भी जल की जरुरत होती है . ट्रांसपोर्टेशन के लिए जल की जरुरत होती है . जलवायु परिवर्तन में जल का भी महत्वपूर्ण योगदान होता है . अगर पृथ्वी पर जल नहीं हो तो चारो तरफ हाहाकार मच जाएगा . इसलिए साफ़ शब्दों में कहे तो जल ही जीवन है और मनुष्य जाती का उत्पति का आधार ही जल है .
इसलिए हम सबको जल सरक्षण जरूर करना चाहिए क्योकि जल का भंडार लिमिट है , कहीं जल संकट पैदा ना हो जाय .

राजस्थान राज्य के जैसलमेर शहर में दिनदयाल शोध संस्थान इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र नई दिल्ली के तत्वाधान में जल संरक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। और इस कार्यक्रम में डॉ भुवनेश जैन द्वारा जल संस्कृति पर आधारित प्राचीन तकनीकों पर प्रकाश डाला गया। इसके साथ ही इस कार्यक्रम में जल संरक्षण के अच्छे प्रभावों पर भी चर्चा की गयी की क्यों यह आवश्यक है और इनका महत्व क्या है। ताकि लोग इसके महत्व को जान सके समझ सके और जागरूक हो सके .

अगर हम जल के महत्त्व को नहीं समझेंगे तो अगला अगला विश्व युद्ध जल को लेकर होगा और दुनिया भर में मानव का अस्तित्वा समाप्त हो जाएगा .

 

निष्कर्ष :- हम सभी को जागरूक बनकर जल को महत्व को भलीभांति समझना होगा और ये प्रण लेना होगा की खुद इस बात को समझे और लोगों को भी इससे अवगत करवाएं, तभी मानव जाती का समाज का देश का और विश्व समुदाय का कल्याण हो पाएगा . अब मै ज्यादा नहीं बताऊंगा आप सभी खुद समझदार है .
अगर आप मुझे कोई सुझाव देना चाहे तो comments जरूर करें. आपका स्वागत है .

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