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बुद्ध और अंगुलिमाल की कहानी हिन्दी में-Buddh and Daku Angulimal Story

बुद्ध और अंगुलिमाल की कहानी हिन्दी में

बुद्ध और अंगुलिमाल की कहानी हिन्दी में

 

 

एक परिचय

बुद्ध और अंगुलिमाल :- गौतम बुद्ध के बारे में सभी ने सुना होगा, वे एक सत्य- अहिंसा और त्याग की मुर्ति थे । उन्होने ज्ञान की प्राप्ति के लिए घोर तपस्या की । ज्ञान की प्राप्ति के बाद हर गांव-गांव, नगर-नगर भ्रमण करके ज्ञान का प्रचार करते थे ।

 

एक बार की बात है, भगवान बुद्ध ज्ञान की प्रचार करने हेतु भ्रमण करते हुए कोशल महाजनपद की राजधानी श्रावस्ती पहुँचें। ऎसा था कि जब भगवान बुद्ध किसी भी नगर में पधारते थे तो उसका उपदेश  सुनने के लिए दुर-दुर से उनके अनुयायी आते थे ।

और इस बार बहुत ही कम अनुयायी आए हुवे थे और जो भी आए उनके मन में डर और घबराहट जैसे भाव परिलक्षित हो रहे थे , वे बार-बार घबराकर उठ जाते थे यूँ कहुं तो विचलित हो जाते थे । जिसे भगवान बुद्ध ने उनलोगों की मन: सिथति को भांप लिया और उनसे पुछा-क्या बात है और इस प्रकार आप सब घबराएँ हुए क्यों है ।

बुद्ध द्वारा पुछे गए प्रशनों का उतर देने का साहस किसी मै नही था । फ़िर भगवान बुद्ध ने उनलोगो कि मन: स्थति से ज्ञात कर लिया कि -मगध देश की जनता में डर समाया हुआ है । क्योकिं अंगुलिमाल डाकु के आतंक से अंधेरा होते ही लोग अपने घरों से बाहर निकलने का कोई भी हिम्मत नही जुटा पाता ।

अंगुलिमाल एक बहुत ही खुंखार और भयानक डाकु था । वह मगध देश के घने जंगल में रहता है। और उस जंगल से होकर गुजरने वाले राहगीर अथवा व्यापारियों को लुट लेते थे, फ़िर उसकी हत्या करके उसकी एक अंगुली काटकर माला बनाकर अपने गले में पहन लेता था । और इस प्रकार उसका नाम अंगुलिमाल पडा ।

अंगुलिमाल देखने में भी बहुत भयानक लगता था, उसका शरीर विशाल है. उसके चेहरे पर बड़ी बड़ी मूँछें हैं.

कथा

घने लटियाए हुए बिखरे बाल हैं. बड़े-बड़े, लाल-लाल, आग बरसाते नेत्र, उँगलियों में बड़े बड़े कटार-से नाखून और उसकी बलिष्ठ भुजाओं की कसी हुई मांसपेशियें ने उसे इतना खूंखार बना रखा हैं कि प्रतीत होता है उसने कई हाथियों को भी चनौती दे डाली होगी ।

फ़िर भगवान बुद्ध डाकु अंगुलिमाल के पास जंगल में जाने को तैयार हो गया और कहा मैं इस दुख से आप लोग को मुक्त करुगां ।

गांववालों ने बुद्ध को बहुत रोकना चाहा , क्योकिं वे जानते थे कि अंगुलिमाल से बच पाना बहुत मुश्किल है । लेकिन भगवान बुद्ध ने मन ही मन ये ठान लिया कि मै जरुर उस डाकु से मिलुंगा ।

 

फ़िर भगवान बुद्ध अपने शान्त और एकाग्रचित मुद्रा से जंगल की ओर चलते रहे, जिस ओर डाकु अंगुलिमाल रहता था ।

घने जंगल चालु होते ही भगवान बुद्ध कुछ ही दुर गये होंगे, कि पिछे से किसी की कर्कश आवाज सुनाई पडी -“ठहर जा,कहां जा रहा है “।

फ़िर भगवान बुद्ध सबकुछ सुनकर भी अनसुना करके लगातार चलते रहा जैसे कुछ सुना नही ।फ़िर पिछे से एक जोरदार आवाज आई- मैं कहता हुं -ठहर जा ।

अबकी बार भगवान बुद्ध रुक गए और पिछे मुडकर देखा । तो क्या देखते है कि सामने एक खुंखार काला-कलुटा व्यक्ति खडा है । लंबा-चौडा शरीर , लम्बे-लम्बे बढे बाल, एकदम काला रंग, लंबे-लंबे बढे नाखुन, लाल-लाल आंखे और हांथ में कृपाण लिए बुद्ध को एकटक देख रहा था । अंगुलिमाल के गले में अंगुलियों की माला लटक रहा था, जिससे वो और भी खुंखार प्रतीत हो रहा था ।

फ़िर भगवान बुद्ध ने उसे शांत और मधुर स्वर में कहा-“मैं तो ठहर गया। भला तु कब ठहरेगा ।

फ़िर अंगुलिमाल ने बुद्ध के चेहरे की ओर देखा, उनके चेहरे पर भय नाम की कोई चीज नही थी । जबकि वो जिन लोगों को वह रोकता था वो तो डर के मारे थर-थर कांपने लगते थे ।

बुद्ध और अंगुलिमाल

फ़िर अंगुलिमाल उसे डराने के लिए बोला- हे सन्यासी ! तुम्हे डर नही लगता । देखो मैने कितने लोगो को मारकर और उसकी अंगुलि को काटकर माला पहन रखी है ।

भगवान बुद्ध बोले-तुमसे क्या डरना ? डरना हो तो उससे डरो जो सचमुच ताकतवर है । फ़िर अंगुलिमाल जोर-जोर से हंसने लगा और कहा- से साधु ! तुम क्या समझते हो कि मैं ताकतवर नही हुं । मैं एक बार में दस-दस लोगों के सिर को धड से अलग कर सकता हुं ।

फ़िर बुद्ध उनसे बोले-‘यदि तुम सचमुच ताकतवर हो तो जाओ और उस पेड से दस पते तोडकर लाओ । अंगुलिमाल ने कहा- पता क्या चीज है मैं तो पेड को उखाडकर ले आउं।

तो बुद्ध ने कहा- पेड नही उखाडना है, पते तोडकर ले आओ । तुरन्त अंगुलिमाल दस पते तोडकर लाकर बुद्ध को दे दिए । अब बुद्ध ने उसे कहा- तुम अगर सचमुच ताकतवर हो तो जाओ और इन पतियों को पेड में जोड दो ।

अंगुलिमाल क्रोधित होकर बोला- भला टुटे पते फ़िर से कैसे जुड सकते है ।

फ़िर भगवान बुद्ध ने उसे कहा- तुम जिस चीज को जोड नही सकते, उसे तोडने का अधिकार तुम्हे किसने दिया ?

तुम आदमी का सिर जोड नही सकते हो, काटने में क्या बहादुरी ? अंगुलिमाल भगवान बुद्ध ये

तर्क सुनकर अवाक रह गया । वह चुपचाप महात्मा बुद्ध की बातों को सुनता रहा । एक अजनबी शक्ति ने उसे अंदर से बदल दिया ।और उसे यह यहसास होने लगा कि सचमुच कोई मुझसे भी ताकतवर है । फ़िर उसे आत्मग्लानि होने लगी ।

 

फ़िर वह भगवान बुद्ध के चरणों मे गिर पडा और बोला -हे भगवन ! मुझे क्षमा कर दीजिए, मुझसे बहुत बडी गलती हो गई । मै रास्ते से भटक गया था ।

आप मुझे अपनी शरण में ले लीजिए। फ़िर भगवान बुद्ध ने उसपर जल छिड्क दिया और उसे अपना भक्त बना लिया । आगे चलकर यह अंगुलिमाल बहुत बडा साधु बना ।

शिक्षा:- इस कहानी से हमें यही शिक्षा मिलती है कि व्यक्ति कितना भी बुरा क्यों न हो अच्छे संगत के प्रभाव से वह भी ईसान बन सकता है । असत्य कितना भी बलवान क्यों न हो अंत में बिजय सत्य की ही होती है । सत्य परेशान हो सकता है, पराजित नही ।

 

दोस्तो, अगर आपके पास इस तरह की कोई प्रेरणादायक (Motivational) कहानी हो तो हमें लिख भेजियॆ, हम उसे अपने site मे प्रकाशित करुगां। my Email id: inderkumar190@gmail.com

 

 

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