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हाथी और रस्सी की कहानी-एक शिक्षाप्रद कहानी

 

हाथी और रस्सी की कहानी motivation story

हाथी और रस्सीएक समय की बात है , किसी गांव में चार-पांच आदमियों का एक समूह कहीं जा रहा था | वे सभी मुख्य सड़क से न होकर गांव से होकर जा रहा था |
फिर वे लोग क्या देखते है की उस गांव के जमींदार के घर के बाहर रस्ते के किनारे एक विशालकाय हाथी को एक पतली सी रस्सी में से बंधा हुआ देखकर उसे बड़ा ही आश्चर्य हुआ जैसे दुनिया का आठवां अजूबा देख लिया हो |
क्योंकि वह विशालकाय जानवर जो कि बड़े – बड़े पेड़ों को उखड फेंकता है, और वह जब चाहता उस रस्सी को तो झटके में तोड डालता , लेकिन फिर भी क्यों उस रस्सी के सहारे ऐसे बंधा है जैसे उसे मोटी – मोटी जंजीरों से बंधा गया हो|

लेकिन उस दिन वे सभी कहीं किसी जरुरी काम से जा रहे थे और समय की पाबन्दी भी थी इसलिए थोड़ी जल्दी से निकल गया, ज्यादा विचार नहीं किया | की इस रस्सी में ऐसा क्या राज है |
परन्तु एक दिन फिर जब वे सभी वही रास्ते और उसी गांव से गुजर रहे थे तो उसने फिर से वही नजारा देखा, कि आज भी वो विशालकाय हाथी उसी पतली रस्सी से बंधा हुआ था| और हांथी चुप-चाप खड़ा था |

फिर उनलोगो ने सोचा -इसके पीछे क्या राज है | आज जान के ही रहेंगे | फिर उन सबने विचार करके, वहां पर एक आदमी था जो हाथी की देखभाल करने वाला थे के पास चला गया | और उससे पूछा – भाई साब अगर आप बुरा न माने तो एक बात पूंछू |

उन सबने ने महावत से पूँछा कि, ‘क्यों ये विशालकाय हाथी को इतनी पतली रस्सी से बंधे होने के बाद भी इसे तोड़कर भागे का प्रयास क्यों नही करता है, जबकि ये जब चाहे इस रस्सी को बड़ी आसानी से तोड़ सकता है|’

 

हाथी और रस्सी की कहानी-एक शिक्षाप्रद कहानी

महावत ने उस सभी को बड़ी ही प्रेम से समझाया और जो वजह उस महावत ने बतायी उसे सुनकर सभी आश्चर्य चकित हो गए |
महावत ने उस आदमी को बताया कि, ‘ जब ये हाथी छोटे होते है तब इन्हें ऐसी ही पतली रस्सियों से बांधा जाता है, और उस समय छोटे हाथी उस रस्सी को तोड़ने का पूरा प्रयास करते है, किन्तु उस समय इनमें उतनी शक्ति नहीं होती कि ये इस रस्सी को तोड़ पते |और बहुत सारे प्रयासों के बावजूद भी जब ये रस्सी को नहीं तोड़ पाते तो इन्हें ये यकीन हो जाता है कि ये इस रस्सी को कभी भी नही तोड़ सकते| उसके बाद ये हांथी का बच्चा इस पतली सी रस्सी को तोड़ने का कभी प्रयास नहीं करता |
क्योकि उसके दिमाग में ये mind set हो जाता है की मै कभी भी इस रस्सी को नहीं तोड़ पाउँगा | और फिर बड़े होने एवं शरीरिक रूप से बहुत शक्तिशाली बनने के बाद भी ये इस रस्सी को तोड़ने का कभी प्रयास ही नहीं करते सिर्फ उस यकीन की वजह कि ये इस रस्सी को नहीं तोड़ सकते|’

Friends यह short story से हमें यह सिखाती है कि, ये जरूरी नहीं है कि यदि कल हम किसी काम में असफल हो गए थे तो आज भी सफल नही हो सकते | हममें से ज्यादातर लोग किसी काम में एक -दो बार सफल न होने पर ये यकीन कर लेते हैं कि वो इस काम को कभी भी नहीं कर सकते| और उसी यकीन की वजह से उस काम को करने का फिर कभी प्रयास ही नहीं करते फिर चाहे हालात कितने ही क्यों न बदल जाएँ|
हमें इस बात को याद रखना चाहिए:

Failure is the pillar of Success .
यानि सफलता के लिए पुरे मन से तैयारी नहीं की मैंने.

असफलता हमें ये सीखाती है कि हमारे प्रयास में कुछ कमी थी| और यदि आप भी किसी ऐसे ही काम में असफल होने के बाद ये यकीन कर बैठे है कि ये आप से नहीं होगा तो एक बात रखना कि, “हम इंसान है जानवर नहीं|”

हाथी और रस्सी की कहानी-एक शिक्षाप्रद कहानी

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