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भारतीय किसान पर निबंध-an essay on Indian farmers in Hindi

भारतीय किसान पर निबंध  – an essay on Indian farmers in Hindi

भारतीय किसान पर निबंध

 

 

 

भारतीय किसान पर निबंध

प्र्स्तावना

भारतीय किसान : भारतीय किसान का नाम लेते ही हमारे मानस पटल में एक चेहरा आता है, जो एक फ़टेहाली

तथा तपस्या की मुर्ति है । जो कठिन मेहनत करके सुखी बेजान पडी धरती से संघर्ष करके उससे सोना उगाता है|

भारत एक कृषि-प्रधान देश है | भारत गांवों का देश है , क्योकिं इस देश की 8०% आबादी गांवों में बसती है। इन गांव-वालों का मुख्य पेशा या रोजगार कृषि है यानि ये कृषि पर आधारित है । इनका जीवन-यापन खेती से ही चलता है ।

किसान बहुत मेहनत करता है। वह भरी बरसात या चिल-चिलाती धुप या कडाके की ठंढ में मौसम का परवाह किए बिना मेहनत करता है और हमारे लिए अनाज, फ़ल तथा सब्जियां उपजाता है । वह पशुपालन भी करता है और वह अनाज, फ़ल, सब्जी के अलावा हमारे लिए दुध, दही, मक्खन, दलहन, तेलहन आदि भी उपजाता है।

हमारे किसान भाईयों के पास खेती लायक अच्छी जमीन भी नही होती है। स्वतंत्रता प्रप्ति के पुर्व भारतीय किसान जमीन्दारों के यहां मजदुरी करते थे, और उनका खेत जोतते थे । और जमीन्दर उससे मनमाना मालगुजारी वसुलते थे, जिसे वे पुरा फ़सल देके भी चुका नही पाते थे, फ़लस्वरुप अपने धरती माता को बचाने के लिए जमीन्दार के यहां मजदूरी करते थे । किसान अपनी जमीन को अपने मां से भी बढकर मानते है ।

भारतीय किसान का महत्व

भारतीय किसान सत्य, ईमान्दार और तपस्या की जीती-जागती मिशाल है । वह धरती की छाती को फ़ाडकर उससे अनाज उगाता है ।

किसान की दिनचर्या सबसे अलग होती है । किसान सुबह-सुबह उठकर अपने पशुओं के लिए चारा काटकर उसको खिला-पिलाकर और खुद भुखे रहकर तथा शरीर पर एक गमछा लपेटकर अपने कंधे पर हल -बैल लेकर  साथ खेत पर निकल जाते है।

किसान वही खेत पर ही अपना जलपान करता है, और फ़िर काम पर लग जाता है, चाहे कैसा भी मौसम क्यों नही हो, वो अपने खेत से घर नही आता है, वो उसकी कर्म-भुमि है।

दोपहर का खाना उसकी पत्नी या बच्चॆ वही खेत पर ही लेकर जाते है, और वे वही पर खाना खाते है, और शाम होने तक अपने काम में लगा रहता है, शाम होने पर अपने पशुधन जैसे-गाय, बैल, बकरी या मवेशी के साथ वापस घर आता है, और वो अपने पशुधन के साथ ही सोता है , और बैल का वे बिशेष ध्यान रखते है, क्योकिं बैल के बिना खेती करना नामुमकिन है।

 

भारतीय किसान बर्षा के पानी पर निर्भर है, क्योकिं बर्षा के अलावा सिचाई का कोई साधन नही है। वे खेत में फ़सल बोते है, और रात में भी उसकी रखवाली करते है, ताकि कोई अवारा पशु या कोई दुशमन उसके मेहनत पर पानी न फ़ेर दे ।

इस काम में उनके साथ असका पुरा परिवार पत्नी और उसके बच्चे भी साथ देते है ।

हमारे देश के किसान की हालत काफ़ी दयनीय होती है। उनकी आय बहुत कम होती है, क्योकिं

उनकी अच्ची आय नही हो सकती। इसके कई कारन है:-

भारतीय किसान छ्ह महीने काम करता है और बाकी के छ्ह महीने खाली और बेकार बैठे रहता है और साथ मे उसका खेत भी खाली रहता है, जिससे उनकी आय सीमित होती है ।

खेती के उन्नत संसाधनॊ का उपयोग नही कर पाता है, वह अपने पुराने तौर-तरीके एवं अपने औजारों से खेती करता है, जिससे अच्छी फ़सल नही होती है ।

भारतीय किसान खेती के लिए बर्षा के जल पर निर्भर होता है, जिस साल अच्छी बर्षा होती है, उस साल खेती होने के पुरे चांस होता है, अन्यथा सुखे व अकाल का सामना करना पडता है, अकाल पडने से भुखे मरने की नोबता आ जाती है । उसके पास सिचाई के और कोई विकल्प नही है ।

भारतीय किसान अनपढ होते है, जिससे वे कई अंधबिश्बास और कुरुतियों के शिकार होते है, और उनहे खेती के नये-नये तरीके के बारे मे पता नही चलता है ।

गांव में कोई पाठ्शाला नही होती है, जिससे वे अपने बच्चे को भी बाहर पढ्ने के लिए नही भेज पाते है, जिससे कारन उसके बच्चे भी अनपढ रह जाते है ।

हमारे भारत देश को आजद हुए ७० बर्ष हो गए है, फ़िर भी हमरे देश के किसान गरीब के गरीब है, वे आज भी अनपढ है, वे अपने बच्चे से खेत मे काम लेते है, जंगल में मवेशी चराने भेज देते है । उनका पुरा परिवार दिन-रात बस खेत और खलिहान मे भी व्यसत रहते है, उसे दुसरी दुनिया का कोई भनक भी नही लगता ।

अगर सरकार किसानों के लिए कॊई योजना लाती भी है, तो उसका फ़ायदा किसान को नही मिल पाता है, बिचौलिया बीच मे ही हडप जाता है ।

एक कहावत है कि किसान गरीबी मे पैदा होता है और गरीबी मे मर जाता है

ये लाजिमी है, अशिक्षा के कारण ही भारतीय किसान सामाजिक कुरीतियों, कुसंस्कारों में बुरी तरह जकड़े हुए हैं और पुरानी रूढ़ियों नियमो को तोड़ना बहुत बडा पाप समझते हैं ।

फलस्वरूप शादी-विवाह, जन्म-मरण के अवसर पर भी झूठी मान-प्रतिष्ठा और लोक-लज्जा के कारण साहुकार से उधार लेकर भी भोज आदि पर खूब खर्च करते हैं और सदैव कर्ज में डूबे रहते हैं । अंतत: कर्ज में ही मर जाते हैं ।

 

भारतीय किसान इतना गरीब होता है, कि उनहे दो वकत की रोटी भी नसीब नही होता है,न वे अच्छॆ कपडे पहन पाते है,उनके बच्चे फ़टे कपडे पहनते है, उनकी पत्नी कभी गहने नही खरीद सकती, उनका घर भी फ़ुस का भी बना होता है।

हमारे देश के किसान फ़सल तो उगाता तो जरुर है, लेकिन उसे वह उंचे दाम पर नही बेच पाता है, दलाल एवं बिचोलिया उसे ठग जाता है, जिससे उसके फ़सल का उचित कीमत नही मिल पाता है ।

कोई भी अनजान आदमी दुर से ही किसानो को देखकर बता देगा, उसकी पहचान यह है कि उसके पैर मे न जुते होते है और तन पर ढंग के कपडे होते है, उसका शरीर भी सुखा होता है, क्योकिं गरीब किसान विटामिन युक्त भोजन कहां से लाएगा, उसे दो वक्त की रोटी मिल जाए यही बहुत है, उसका शरीर नर-कंकाल बन जाता है । उनके शरीर में रोनक या चमक बिल्कुल ही नही दिखती ।

हमारे देश के वैज्ञनिकों ने इतनी तरक्की कर ली , वे चांद पर पहुंच गए, फ़िर भी किसान पुराने तौर-तरीके से यानि हल-बैल से ही खेती करते है, ट्रेक्टर का उपयोग नही करते, उतम प्र्कार के खाद-बीज और कीटनाशक दवाए का उपयोग नही करते । गांव में बिजली नही होती है, जिससे वे पंपसेट से सिचाई कर सके ।

वे जमीन्दारों के चंगुल से मुक्त नही हो पाते है, वे अपने खेती के लिए जमीन्दार से ही कर्जा लेते है, और जमिन्दार ब्याज के रुप मे मनमाना पैसा वसुलते है ।उनके पास सिचाई के कोई साधन नही है, जिससे वे अपने खेत का पुरा फ़ायदा नही उठा पाते ।

अगर विदेशों की बात की जाय तो वहां के किसान अमीर होते है, क्योकिं वहां पर उसके फ़सल को बेचने के लिए मार्केट होता है, जहां पर उसे सही दाम मिलता है।

भारतीय किसान की स्थिति सुधारने के उपाय

किसानों की स्थिति को कैसे सुधार सकते है, आइए जानते है:-

सबसे पहले गांव से नजदीक एक कृषि अनुसंधान खोलना चाहिए जिससे किसानो को नए और उन्नत तरीके सिखाकर खेती की जाय, जिससे पैदावर में बहुत वृध्दि हो , तभी किसान खुशहाल हो पाएगा ।

किसान को फ़सल को बेचने के लिए मार्केट हो, जहां उसे पुरी कीमत मिले , दलाल और बिचोलियो को हटा दे ।

किसान को खाद-बीज, कीटनाशक दवाएं तथा कृषि-कार्य के उपकरन में भारी छुट मिलनी चाहिए ।

जमीन्दारी प्र्था को खत्म कर दी जाय । किसानो के लिए कृषि विकास लोन की व्यवस्था की जाए।

खेती करने के नए-नए तरीके इजाद की जाय। सिचाई की व्यवस्था की जाय। खेत कभी खाली न रहे। व्यापारिक खेती पर ध्यान दिया जाय जैसे-दलहन, तिलहन तथा फ़ुलो की खेती, येलोवेरा आदि की खेती तो इससे किसान की आय में जबरदस्त वृध्दि होगी और किसान सुखी और समपन्न हो पाएगा ।

किसान को शिक्षित किया जाए, इसके लिए गांव-गांव मे सकुल खोले जाए, रात्रि एवं प्रौढ शिक्षा पर जोर दिया जाय । किसान शिक्षित होगें तभी समाज में फ़ेले अंधविश्वास और कुरुतियों का सर्वनाश होगा और स्कुल में सत्य और इमान्दार शिक्षक रखा जाए तथा पढाई के साथ एक चेप्टर कृषि पर भी हो । दुरदर्शन

तथा आकशवानी पर भी कृषि पर आधारित प्रोगाम दिखाया जाय, जिससे हमारे किसान भाई खाश प्रेरित हो। किसान के लिए एक कार्ड बनाया जाय जहां हर जगह प्रायिक्ता मिले, तबी वे आगे बढ्ना चाहेगा, और किसान सुखी रहेगा तभी हमारा देश तरक्की कर पाएगा ।

सरकारी योजनाओ में किसानो के लिए स्पेशल पेकेज दिया जाय ।

भारत सरकार को चाहिये कि किसान के जीवन-स्तर को उंचा उठाने के लिए हर-सभव प्रयास करना चाहिए ।

 

 

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