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Biography

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की जीवनी-Biography of Narendra Modi

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की जीवनी

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की जीवनी

एक चाय बेचने वाला साधारण आदमी भारत देश का प्रधानमंत्री बना, इसके जीवनी को पढकर हम सभी नवयुवकॊ को प्रेरणा लेनी चाहिए।

नरेन्द्र मोदी के जीवन में कई कठिनाई जिसे सबको झेलते हुए आगे बढते गए, और सफ़ल हुए|

भारतबर्ष के तत्कालिक प्रधानमंत्री  श्री नरेन्द्र मोदी कौन नही जानता ? आज हर किसी के जुवान पर मोदी-मोदी है, क्योकिं प्रधानमंत्री बनने के बाद इन्होने ऎसे-ऎसे बदलाव किए है, कि हर आदमी के जुवान पर मोदी छा गऎ- जैसे-नोटबन्दी, GST आदि आदि । नरेन्द्र मोदी ऎसे प्रधानमंत्री है जो कथनी नही करनी में बिश्वास रखते है ।

 

हमारे देश से ये एकमात्र येसे प्रधानमंत्री है, जिनका जन्म स्वतंत्रा के बाद हुआ । गुजरात में जन्मे इस बालक ने चाय बेचने से लेकर प्रधानमंत्री तक का सफ़र पार किया, ये किसी ने सोचा भी नही होगा ।

नरेन्द्र मोदी प्रधानमंत्री बनने के पहले वो गुजरात के मुख्यमंत्री रह चुके है, और उन्होने अपने कार्यकाल में ऎसे-ऎसे कार्य किए है कि गुजरात की जनता उनहे हमेशा याद रखेगी । नरेन्द्र मोदी ने अपने कठिन मेहनत और परिश्रम के बल पर गुजरात को एक मॉडल राज्य के रुप में प्रस्तुत किया, जिसे देखकर जनता की उम्मीदे बढ गई। अब नरेन्द्र मोदी भारत देश को गुजरात के जैसा ही मॉडल बनाएंगे ।

नरेन्द्र मोदी : जन्म और पारिवारिक परिदृश्य

(Narendra Modi: Birth & family background)

नरेन्द्र दामोदर मोदी का जन्म 17 सितम्बर 1950 मेहसाणा जिले के वडनगर में एक मध्यम वर्गीय परिवार में हुआ था। इनके पिता श्री दामोदर मुलचंद मोदी तथा माता का नाम हीराबेन मोदी है ।

नरेन्द्र मोदी अपने छह भाई-बहनों में तीसरे संतान थे ।

मोदी के एक भाई का नाम सोमाभाई मोदी है, जो सेवानिवृत स्वास्थ्य अधिकारी है, लेकिन अब वृध्दाश्रम चलाते है, दुसरे भाई प्रहलाद मोदी है , जिनकी अहमदाबाद में दुकान चलाते है और एक अन्य भाई पंकज मोदी सुचना विभाग में कार्यरत है। मोदी के बहन का नाम बसन्तीबेन हंसमुखलाल मोदी है ।

उनके पिताजी की एक छोटी सी चाय की दुकान चलाते थे, जब मोदी छोटे थे, तब अपने पिताजी के मदद कर दिया करते थे, और वे वडनगर रेलवे स्टेशन पर रेलगाडियों में चाय बेचा करते थे ।

17 बर्ष की उम्र में मोदी का विवाह जशोदाबेन चमनलाल के साथ हो गया था, लेकिन उनकी ये गृहस्थ-जीवन ज्यादा नही चली और अलग हो गए ।

नरेन्द्र मोदी: शिक्षा ( Narendra Modi: Education)

मोदी की प्रारम्भिक शिक्षा वडनगर मेंही हूई। मोदी का पढाई मे मन नही लगता था, पढाई में वे एक औसत छात्र था, इसके अलावा मोदी की अधिक रुचि वाद-विवाद था, जब वो भाषण देते थे तो सुनने वाले का अपनी ओर आकर्षित कर लेते थे । इसके लिए वे सम्मानित भी हो चुके है।

वे अपने भाई सोमाभाई मोदी के साथ मिलकर चाय बेचा करते थे, बाद में उसने अपना खुद का स्टॉल खोल लिया था ।

स्नातक करने के बाद मोदी ने घर छोड दिया और भारत-भ्रमण करने निकल गए। मोदी ने पुरे दो साल में ऋषिकेश, हिमालय, रामकृष्ण मिशन और उतर-पुर्वी भारत के विभिन्न भागों में भ्र्मण किया और वहां के संस्कृती को देखा और समझने की चेष्टा की ।

1971 में वापस लोटने के बाद वे अहमदाबाद चले गए और RSS (राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ) के सद्स्य बन गए । और RSS का प्र्चार करते हुए उन्होने गुजरात विश्वविधालय से राजनीति विज्ञान में स्नतकोतर की शिक्षा तथा 1983 में  दिल्ली विश्वविधालय से मास्टर की डिग्री हासिल की ।

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नरेन्द्र मोदी का राजनितिक जीवन का सफ़र

(Narendra Modi’s political lifes story)

नरेन्द्र मोदी जब विश्वविद्यालय के छात्र थे तभी उन्होने RSS के सद्स्यता ले चुके थॆ , और इसे वो बखुबी से निभा रहे थे । और उसने कर्मठता एवं मेहनत के बल पर भारतीय जनता पार्टी का जनाधार मजबूत करने में प्रमुख भूमिका निभायी। तथा गुजरात में शंकरसिंह वाघेला का जनाधार मजबूत बनाने में नरेन्द्र मोदी की ही रणनीति थी।

 

अप्रैल १९९० में जब केन्द्र में मिली जुली सरकारों का दौर शुरू हुआ, वहाँ मोदी की मेहनत रंग लायी ।

पुन: गुजरात में १९९५ के विधान सभा चुनावों में भारतीय जनता पार्टी ने दो तिहाई बहुमत प्राप्त कर सरकार बनाया।

इसी दौरान दो राष्ट्रीय घटनायें और इस देश में घटीं। पहली घटना थी सोमनाथ से लेकर अयोध्या तक की रथयात्रा जिसमें आडवाणी के प्रमुख सारथी की मूमिका में नरेन्द्र का मुख्य सहयोग रहा। तथा दुसरी घटना  कन्याकुमारी से लेकर सुदूर उत्तर में स्थित काश्मीर तक की मुरली मनोहर जोशी की दोनो में ही नरेन्द्र मोदी की मुख्य भुमिका रही । इसके बाद शंकरसिंह वाघेला ने पार्टी से त्यागपत्र दे दिया, जिसके परिणामस्वरूप केशुभाई पटेल को गुजरात का मुख्यमन्त्री बना दिया गया और नरेन्द्र मोदी को दिल्ली बुला कर केन्द्रीय मन्त्री का दायित्व सौंपा गया।

 

१९९५ में राष्ट्रीय मन्त्री के नाते उन्हें पाँच प्रमुख राज्यों में पार्टी संगठन का काम दिया गया जिसे उन्होंने बखूबी निभाया। 1998 में उन्हें पदोन्नत करके राष्ट्रीय महामन्त्री (संगठन) का उत्तरदायित्व दिया गया। इस पद पर वह अक्टूबर 2001 तक काम करते रहे।

भारतीय जनता पार्टी ने अक्टूबर 2001 में केशुभाई पटेल को हटाकर गुजरात के मुख्यमन्त्री पद की कमान नरेन्द्र मोदी को सौंप दी।

पहली बार गुजरात के मुख्यमंत्री नरेन्द्र मोदी

(First time Gujarat’s Chief Minister Narendra Modi)

7 अक्टूबर 2001 को नरेन्द्र मोदी गुजरात के मुख्यमंत्री चुन लिए गए । इसके बाद मोदी ने राजकोट विधानसभा चुनाव लड़ा और अपने निकटतम काँग्रेस पार्टी के उम्मीदवार आश्विन मेहता को 14,728 मतों से हरा दिया।

क्योकिं उस समय मोदी को कोई प्रशसनिक अनुभव नही था, इसलिए भाजपा के नेता लालकृष्ण आडवाणी, मोदी के सरकार चलाने के अनुभव की कमी के कारण चिंतित थे। इसलिए उन्हे उप-मुख्यमंत्री का पद दे रहे थे, लेकिन मोदी ने उप मुख्यमंत्री बनने का प्रस्ताव ठुकरा दिया और आडवाणी व अटल बिहारी वाजपेयी से बोले कि यदि गुजरात की जिम्मेदारी देनी है तो पूरी दें अन्यथा न दें।

2002 गुजरात दंगें

27 फ़रवरी 2002 को अयोध्या से गुजरात वापस लौट कर आ रहे कारसेवकों को गोधरा स्टेशन पर खड़ी ट्रेन में मुसलमानों की हिंसक भीड़ द्वारा आग लगा कर जिन्दा जला दिया गया। इस हादसे में 59 कारसेवक मारे गये थे। इस घटना की प्रतिक्रिया स्वरूप समूचे गुजरात में हिन्दू-मुस्लिम दंगे भड़क उठे। मरने वाले 1180 लोगों में अधिकांश संख्या अल्पसंख्यकों की थी।

 

इसके लिये न्यूयॉर्क टाइम्स ने मोदी प्रशासन को जिम्मेवार ठहराया।[36] कांग्रेस सहित अनेक विपक्षी दलों ने नरेन्द्र मोदी के इस्तीफे की माँग की।मोदी ने गुजरात की दसवीं विधानसभा भंग करने की संस्तुति करते हुए राज्यपाल को अपना त्यागपत्र सौंप दिया। परिणामस्वरूप पूरे प्रदेश में राष्ट्रपति शासन लागू हो गया।

 

मानवाधिकार आयोग ने इस निष्पक्ष जांच के लिए बिशेष इन्वेस्टीगेशन टीम (SIT) का गठन किया । दिसम्बर 2010 में उच्चतम न्यायालय ने एस॰ आई॰ टी॰ की रिपोर्ट पर यह फैसला सुनाया कि इन दंगों में नरेन्द्र मोदी के खिलाफ़ कोई ठोस सबूत नहीं मिला है।

 

राज्य में दोबारा चुनाव हुए जिसमें भारतीय जनता पार्टी ने मोदी के नेतृत्व में विधान सभा की कुल 182 सीटों में से 127 सीटों पर जीत हासिल कर विरोधियो के मुंह बन्द कर दिया । और इस प्रकार नरेन्द्र मोदी चौथी बार गुजरात के मुख्यमंत्री की कमान संभाली ।

2014 लोकसभा चुनाव और नरेन्द्र मोदी प्रधानमंत्री पद के दावेदार

गोआ में भाजपा कार्यसमिति द्वारा नरेन्द्र मोदी को 2014 के लोक सभा चुनाव अभियान की कमान सौंपी गयी । 13 सितम्बर 2013  को हुई संसदीय बोर्ड की बैठक में आगामी लोकसभा चुनावों के लिये प्रधानमन्त्री पद का उम्मीदवार घोषित कर दिया गया। इस अवसर पर पार्टी के शीर्षस्थ नेता लालकृष्ण आडवाणी मौजूद नहीं रहे और पार्टी अध्यक्ष राजनाथ सिंह ने इसकी घोषणा की। मोदी ने प्रधानमन्त्री पद का उम्मीदवार घोषित होने के बाद चुनाव अभियान की कमान राजनाथ सिंह को सौंप दी। प्रधानमन्त्री पद का उम्मीदवार बनाये जाने के बाद मोदी की पहली रैली हरियाणा प्रान्त के रिवाड़ी शहर में हुई।

 

एक सांसद प्रत्याशी के रूप में उन्होंने देश की दो लोकसभा सीटों वाराणसी तथा वडोदरा से चुनाव लड़ा और दोनों निर्वाचन क्षेत्रों से विजयी हुए|

पार्टी की ओर से पीएम प्रत्याशी घोषित किये जाने के बाद नरेन्द्र मोदी ने पूरे भारत -भ्रमण किया। इस दौरान तीन लाख किलोमीटर की यात्रा कर पूरे देश में ४३७ बड़ी चुनावी रैलियाँ, ३-डी सभाएँ व चाय पर चर्चा आदि को मिलाकर कुल ५८२७ कार्यक्रम किये। चुनाव अभियान की शुरुआत उन्होंने २६ मार्च २०१४ को मां वैष्णो देवी के आशीर्वाद के साथ जम्मू से की और समापन मंगल पांडे की जन्मभूमि बलिया में किया। स्वतन्त्रता प्राप्ति के पश्चात भारत की जनता ने एक अद्भुत चुनाव प्रचार देखा। इसके अलावा नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में भारतीय जनता पार्टी ने २०१४ के चुनावों में अभूतपूर्व सफलता भी प्राप्त की।

प्रधानमंत्री के रुप में नरेन्द्र मोदी

२६ मई २०१४ को भारत के १५वें प्रधानमन्त्री के रुप  में राष्ट्रपति भवन के प्रांगण में आयोजित शपथ ग्रहण समरोह में नरेन्द्र मोदी ने शपथ ली । मोदी के साथ ४५ अन्य मन्त्रियों ने भी समारोह में पद और गोपनीयता की शपथ ली। प्रधानमन्त्री नरेन्द्र मोदी सहित कुल ४६ में से ३६ मन्त्रियों ने हिन्दी में जबकि १० ने अंग्रेज़ी में शपथ ग्रहण की। समारोह में विभिन्न राज्यों और राजनीतिक पार्टियों के प्रमुखों सहित सार्क देशों के राष्ट्राध्यक्षों को आमंत्रित किया गया।

नरेंद्र मोदी इतने लोकप्रिय नेता है की वे आम जनता से जुड़कर वे जनता से सीधी बात करते है और उनकी परेशानिया से अवगत होते है, जैसे- मन की बात , सवच्छता अभियान और फ़िलहाल एक न्य अप्प लांच किया मै नहीं हम|

अवार्ड्स:-
-अब्दुलअजीज अल सऊद के आदेश’ (The Order of Abdulaziz Al Saud) पुरुष्कार-अप्रैल 2016 में.
-अमीर अमानुल्ला खान -यह पुरुष्कार जून २०१६ में अफगानिस्तान के राष्ट्रपति अशरफ गनी द्वारा दिया गया
चैंपियंस ऑफ द अर्थ :- यह अवार्ड्स नरेंद्र मोदी को अन्तरराष्ट्रीय सौर गठबंधन और एक ही बार इस्तेमाल किए जाने वाले प्लास्टिक से देश को मुक्त कराने के संकल्प के लिए दिया |

-प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी को मोदीनॉमिक्स के माध्यम से भारत एवं विश्व में उच्च आर्थिक वृद्धि, भारत में मानव विकास सुधार और लोकतंत्र को सशक्त बनाने तथा अंतरराष्ट्रीय सहयोग और वैश्विक आर्थिक वृद्धि में योगदान के लिए साल 2018 का प्रतिष्ठित सियोल शांति पुरस्कार से सम्मानित किया जाएगा। यह पुरुष्कार पाने वाले में १४ वे व्यक्ति है |

नरेन्द्र मोदी द्वारा रचित कुछ संकलन
सेतुबन्ध – राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के नेता लक्ष्मणराव इनामदार की जीवनी के सहलेखक (२००१ में)
आँख आ धन्य छे (गुजराती कविताएँ)
कर्मयोग
आपातकाल में गुजरात (हिंदी)
एक भारत श्रेष्ठ भारत (नरेंद्र मोदी के भाषणों का संकलन ; संपादक प्रदीप पंडित)
ज्योतिपुंज (आत्मकथन – नरेंद्र मोदी)
सामाजिक समरसता (नरेंद्र मोदी के लेखों का संकलन)

 

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